हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मथुरा-व्रन्दावन में जन्माष्टमी पर आस्था में महिलाओं और बुजुर्गों के साथ युवाओं की बड़ी संख्या भी दिखाई दे रही है। दूर शहरों से आए इन श्रद्धालुओं की आंखों में एक ही चमक है, कान्हा के दर्शन की और उनकी जन्मभूमि की रज माथे से लगाने की। अपने आराध्य के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को साथ ले लिया। कान्हा के जन्मस्थान के दर्शन की इच्छा हुई तो मथुरा आ गए। लड्डू गोपाल को दर्शन स्थल के भीतर ले जाने की अनुमति नहीं मिली तो कुछ पल मन उदास हुआ, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को समझते हुए उन्हें कमरे में छोड़कर जन्मस्थान के दर्शन करने चले गए। अजमेर के केशव वैष्णव के लिए कृष्ण भक्ति की डोर घर से जुड़ी है। तिहारी कनपुरा के रघुनाथ मंदिर में उनके पिता सेवा करते हैं। पिता को प्रतिदिन ठाकुर जी की भक्ति में लीन देखते-देखते उनके मन में भी श्रद्धा जागी। पहली बार अकेले ब्रज आने का भाव बना। पहले वृंदावन पहुंचे, फिर द्वारकाधीश के चरणों में हाजिरी लगाई और जन्मस्थान पर माथा टेका। जन्माष्टमी का उत्सव कई बार टीवी पर देखा है। कोटा से परिवार के साथ आईं अंतिमा के लिए ब्रज की यात्रा नई नहीं है, लेकिन जन्माष्टमी से ठीक पहले जन्मस्थान के दर्शन की अभिलाषा इस बार पूरी हुई। तीन दिन से कान्हा की नगरी में हैं। बांकेबिहारी लाल से लेकर द्वारकाधीश और जन्मस्थान तक दर्शन कर चुकी हैं। उनके साथ बहन प्रीति और भाई विशाल भी हैं। अंतिमा कहती हैं कि जन्माष्टमी पर ठाकुर जी का जन्मोत्सव अपने लड्डू गोपाल के साथ घर में ही मनाएंगे। मुरादाबाद से आईं राजकुमारी के लिए लड्डू गोपाल परिवार के सदस्य की तरह हैं। दस वर्ष पहले उन्हें वृंदावन से अपने साथ ले गई थीं। तब से हर वर्ष ठाकुर जी को बांके बिहारी के दर्शन कराने की इच्छा रहती है। इस बार बस से ब्रज आईं और पूरे रास्ते लड्डू गोपाल को कृष्ण की ही वैभव गाथा सुनाती रहीं।
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