हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। आगरा में ताजमहल के पीछे स्थित रंगजी मंदिर की भूमि का 200 करोड़ रुपये मुआवजा मंदिर प्रबंधन द्वारा मांगे जाने के बाद अब रंगजी मंदिर की संपत्तियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंदिर प्रबंधन ने कोर्ट में कहा है कि यह उनकी भूमि है और उन्हें मुआवजा दिया जाए। उत्तर भारत के पहले दिव्यदेश के रूप में बसे रंगजी मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की प्रगाढ़ आस्था है। 173 वर्ष पुराने इस मंदिर की संपत्तियां भी देश के कई राज्यों में फैली हैं। कहने को मंदिर का संचालन ट्रस्ट के हाथों में हैं, लेकिन जो भी संपत्ति है, वह ठाकुर जी के नाम दर्ज है। किसी व्यक्ति विशेष का मंदिर की संपत्तियों में कोई अधिकार नहीं है। संपत्तियों के बारे में जानने से पहले मंदिर के बारे में भी जानना जरूरी है। श्रीरंगजी मंदिर में वर्ष भर में 384 उत्सव मनाए जाते हैं। मंदिर की स्थापना रामानुजाचार्य स्वामी रंगदेशिक की इच्छा पर मथुरा के सेठ लक्ष्मीचंद ने अपने भाइयों राधाकृष्ण व गोविंद दास के सहयोग से 1853 में की थी। रंगदेशिक स्वामी यहां भ्रमण को आए फिर गोवर्धन में बस गए। तीनों भाई उनके शिष्य थे। मंदिर में श्रीगोदारंगमन्नार भगवान का मूल विग्रह व उत्सव मूर्ति तथा श्री गरुड़, श्रीसुदर्शन, श्रीविष्वकसेन, श्रीवेणुगोपाल भगवान की प्रतिष्ठा हुई। मंदिर निर्माण में करीब 20 वर्ष लग गए। 55 बीघा क्षेत्रफल में फैले मंदिर के निर्माण पर 45 लाख रुपये खर्च हुए। मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन कहती हैं कि आजादी से पहले 1952 तक मंदिर की संपत्ति में देशभर में 35 गांव शामिल थे। लेकिन, परिसीमन के बाद इनकी संख्या कम कर दी गई। तब गांव मंदिर के नाम किए गए, ताकि यहां होने वाली खेती से मंदिर का संचालन हो सके। राजस्थान के बारां, मुंबई एवं दक्षिण भारत के श्रीरंगम में भी रंगजी मंदिर ठाकुरजी के नाम की संपत्ति है। आगरा में ताजमहल के समीप पूरा बसई गांव रंगजी मंदिर की संपत्ति मेें दर्ज था। परिसीमन से पहले चार हजार बीघा भूमि मंदिर के नाम थी। लेकिन, बाद में यह भूमि 1845 बीघा रह गई। प्रबंधन का कहना है कि ताजमहल के चारों ओर मंदिर की जमीन पर बस्ती बसी है। मेट्रो स्टेशन, पुलिस चौकी मंदिर की संपत्ति में ही बनाए हैं। कीठम झील भी मंदिर की भूमि पर है, जिसे मंदिर ने सरकार को दे दिया। रंगजी मंदिर ट्रस्ट करता है संचालन रंगजी मंदिर में सेवा पूजा व स्वामित्व की विशेषता है कि यहां सेवायत नहीं पुजारी रखे गए हैं, जो नित ठाकुरजी की पूजा करते हैं। मंदिर का संचालन श्रीरंगजी टेंपल ट्रस्ट बोर्ड की ओर से वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी गोवर्धनरंगाचार्य कर रहे हैं। मंदिर की संपत्ति ठाकुरजी के नाम से ही दर्ज हैं।
7455095736
Author: Vijay Singhal
50% LikesVS
50% Dislikes
