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शेरगढ़ के चार गांव बाढ़ आने पर फिर पानी से घिर जाएंगे

ByVijay Singhal

Jul 25, 2026
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
शेरगढ़। मानसूनी बरसात इन दिनों तेजी पकड़ने लगी है। इसके साथ ही यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जैसे-जैसे जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है, वैसे-वैसे हर साल की तरह शेरगढ़ के चार गांवों के ग्रामीणों के दिल की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। दरअसल हर साल यह चारों गांव बाबूगढ़ ,नगला सपेरा, ओवा, और बहटा यमुना के पानी से घिर जाते हैं। इसके बाद ग्रामीणों को प्रशासन द्वारा मुहैया कराए गए भोजन के पैकेटों और राशन पर निर्भर रहना पड़ता है। हर साल मानसून में आने वाली इस समस्या का ठोस उपाय आज तक नहीं किया गया है। शेरगढ़ से इन गांवों के लिए आने वाले रास्ते को तमाम शिकायतों के बावजूद ऊंचा नहीं कराया गया है। सपेरा के नगला निवासी श्यामसुंदर ने बताया कि शेरगढ़ से जो रास्ता आ रहा है, अगर प्रशासन इसको ऊंचा उठाकर बनवा दे तो चार गांवों की तबाही बच सकती है। लेकिन आज तक यह रास्ता ऊंचा नहीं कराया गया है। जिला प्रशासन मदद करने में काफी खर्च कर देता है, लेकिन समस्या के स्थाई समाधान की ओर उसका ध्यान नहीं है। अगर इस रास्ते की घेराबंदी कर दी जाय तो आस पास के सभी गांवों के ग्रामीण चैन की नींद सो सकते हैं। अब जैसे-जैसे बारिश का प्रकोप बढ़ रहा है और यमुना में पानी बढ़ रहा है l वैसे ही लोगो ने अपने-अपने सामान और रहने के लिए जगह देखना शुरू कर दिया है l उन्हें न तो रात को नींद आ रही है और न ही दिन में आराम मिल रहा है। आस पास के लोगों ने बताया कि अगर समय से जिला प्रशासन तैयारी कर लेता है तो कुछ राहत मिल जाती। एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया कि फिलहाल गोकुल बैराज से मात्र 5400 क्यूसेक डिस्चार्ज चल रहा है। अभी खतरे की कोई बात नहीं है। यदि हथिनीकुंड से डिस्चार्ज बढ़ेगा तो उसे यहां पहुंचने में पांच दिन लगेंगे, वहां भी स्थिति सामान्य है। बाबूगढ़ के पास यमुना में तटबंध के कार्य कराने के बाद स्थिति सुधरी है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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