हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छाता-शेरगढ़ रोड पर स्थित एथेनॉल बनाने वाली एलाइंस डिस्टलरी फैक्टरी सवालों के घेरे में आ गई है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय को भी इसकी जानकारी दी है। बताया जा रहा कि जो चावल एफसीआई से लिया जा रहा था उसकी खपत बाजारों में ऊंचे दामों में की जा रही थी और राशन डीलरों से सस्ते दामों पर चावल खरीद कर एथेनॉल बनाया जा रहा था। दो साल से यह खेल चलता आ रहा है। हालांकि जांच में मामले की परतें खुलने की संभावना है। इधर, पुलिस ने बुधवार देर रात फैक्टरी के एमडी समेत तीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, एलाइंस डिस्टलरी फैक्टरी को सरकार द्वारा एथेनॉल बनाने के लिए भारी मात्रा में त्रैमासिक चावल आवंटित किया जाता है। वित्तीय वर्ष में मई से जुलाई तक की अवधि के लिए फैक्टरी को 6500 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया गया था। 10 हजार क्विंटल चावल की अंतिम खेप 24 से 30 जून के बीच में एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के गोदाम से उठान किया गया। इतनी भारी मात्रा में उठान और उसके तुरंत बाद बाजार में बिक्री ने अधिकारियों को चौंका दिया है। अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में एफसीआई गोदाम के रिकॉर्ड सही पाए गए हैं, लेकिन फैक्टरी प्रबंधन सवालों के घेरे में आ गया है। जांच टीम के सामने अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि एथेनॉल के लिए आवंटित चावल बाजार में बेचा जा रहा था तो फैक्टरी के भीतर एथेनॉल का उत्पादन किस चीज से हो रहा था?
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Author: Vijay Singhal
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