हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे गांव प्रधानों पर शिकंजा कसने के बजाय, व्यवस्था उन्हें बचाती नजर आ रही है। जिले के 14 प्रधानों के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत विभिन्न अनियमितताओं की जांच महीनों से लंबित है। प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने को है लेकिन जांच अभी भी अधर में लटकी हुई है।
शिकायतों के आधार पर प्रशासन ने 14 प्रधानों के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इन पर विकास कार्यों में धांधली, शौचालय निर्माण में फर्जीवाड़ा और मनरेगा के बजट का दुरुपयोग करने जैसे आरोप हैं। जांच एक निश्चित समय सीमा में पूरी हो जाती तो संबंधित प्रधानों के खिलाफ रिकवरी और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती थी। स्थिति इसके उलट है। प्रधानों का कार्यकाल समाप्ति के करीब होने के बावजूद इन जांचों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जांच प्रक्रिया में लापरवाही का आलम यह है कि किसी मामले में जांच की जिम्मेदारी एडीएम (एफआर) के पास है तो किसी की अन्य अधिकारियों सौंपी गई है। आला अधिकारियों द्वारा बार-बार पत्र भेजने के बावजूद जांच रिपोर्ट पूरी कर जमा नहीं की जा रही है। सूत्रों की मानें तो राजनीतिक रसूख के चलते जांच अधिकारी मामले को खींच रहे हैं। इनमें कोई जांच दो साल से चल रही है को किसी को एक साल हो गया है।
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Author: Vijay Singhal
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