हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज रिपोर्ट उमाशंकर शर्मा उर्फ कल्लन पंडित
मथुरा। व्रन्दावन की यमुना नदी में चल रहीं नाव अकुशल कारीगरों द्वारा तैयार की जाती हैं। महज दो से ढाई लाख रुपये की कीमत में तैयार होने वाली इन नावों और मोटरबोट के निर्माण के लिए कारीगर न तो किसी संस्थान से प्रशिक्षित हैं न ही उन्हें इस कार्य के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि यमुना में पर्यटकों व श्रद्धालुओं के सैर-सपाटे के लिए इस्तेमाल होने वाली नाव और मोटरबोट सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर तैयार की जाती हैं। कारीगरों को तो बस ऑर्डर दो और अपने मनमुताबिक नाव या मोटरबोट आपको 15 दिन बाद तैयार मिल जाएगी। ध्रुव घाट के निकट नाव, मोटरबोट व चप्पू बनाने वाली एक वर्कशॉप की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली जानकारी मिली। इन नावों का निर्माण पूरी तरह से ग्राहकों की मांग पर निर्भर है। बोट की क्षमता कितनी होगी, उसमें इंजन कौन सा लगेगा और उसकी डिजाइन कैसी होगी, यह सब खरीदार तय करता है। वर्कशाप में पर्यटकों को लुभाने के लिए डबल स्टोरी (दो मंजिला) बोट की मांग बढ़ी है, जिसकी कीमत 2.50 लाख रुपये है। इसमें बुलेट बाइक का इंजन लगाया जाता है। वहीं सिंगल स्टोर वाली मोटरबोट में छोटी बाइकों के इंजन फिट किए जाते हैं। इसी जगह संचालित दूसरी वर्कशॉप में चप्पू वाली नावें तैयार की जा रही थीं। वर्कशॉप संचालक ने बताया कि नाव का बेस, मॉडल, चप्पू, लाइटिंग और बैठने की गद्देदार सीटों के अलग-अलग रेट हैं। जबकि डबल स्टोरी मोटरबोट ऑर्डर पर बनाई जाती है। वहीं डबल स्टोरी मोटरबोट में झूला आदि लगाने के अतिरिक्त दाम हैं।
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Author: Vijay Singhal
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