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बीएसएफ इंस्पेक्टर का पैतृक गांव पचहरा पहुंचेगा शव

ByVijay Singhal

Feb 26, 2026
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। नौहझील थाना क्षेत्र के गांव पचहरा में मंगलवार दोपहर उस वक्त मातम छा गया, जब परिजनों को सूचना मिली कि पश्चिम बंगाल के मालदा में तैनात बीएसएफ इंस्पेक्टर राकेश कुमार रावत (58) का शव संदिग्ध परिस्थितियों में खून से लथपथ मिला है। राकेश रावत वर्तमान में भारत-बांग्लादेश सीमा पर देश की सुरक्षा में तैनात थे। परिजन ने बताया राकेश का पार्थिव शरीर दिल्ली के रास्ते गांव पहुंचेगा। जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगी। परिजन ने बताया कि मूल रूप से पचहरा निवासी बलराम रावत के ज्येष्ठ बेटे राकेश कुमार रावत 4 मई 1986 को सीमा सुरक्षा बल में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती पश्चिम बंगाल के मालदा में बांग्लादेश बॉर्डर पर थी। मंगलवार 24 फरवरी की दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे उनके साथियों ने उन्हें सीमा के पास लहुलुहान अवस्था में पड़ा देखा। आनन-फानन में उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। परिजन ने बताया कि राकेश कुमार रावत का सरकारी हथियार उनके पास ही पड़ा था। उसमें सभी गोलियां भी सुरक्षित थीं। इससे मामला और भी उलझ गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर सिर सहित कुल छह गोलियों के निशान मिले हैं। स्थानीय पुलिस और बीएसएफ के अधिकारी इसकी तफ्तीश में जुटे हैं। चचेरे भाई रिंकू रावत ने बताया कि राकेश रावत हंसमुख स्वभाव के थे। मात्र 17 महीने बाद उनकी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) होनी थी। जनवरी में ही उनका तबादला मणिपुर से मालदा हुआ था। मौत की खबर आने से महज एक घंटा पहले ही उन्होंने अपनी पत्नी सुनीता से फोन पर खुशी-खुशी बात की थी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वह फोन कॉल राकेश की अंतिम बातचीत साबित होगी। उनके दो बेटे कुलदीप और संदीप इंजीनियर हैं और वर्तमान में चंडीगढ़ में हैं।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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