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दशहरा फीका, दिवाली उदास… धान की कीमतों ने तोड़ी किसानों की आस

ByVijay Singhal

Oct 6, 2025
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छह महीने की मेहनत से तैयार धान की फसल से किसानों को अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी। दशहरा और दिवाली की खुशियां इसी उपज पर निर्भर थीं। मगर, बेमौसम बारिश के चलते धान भीग गया, जिससे कीमतें गिर गईं। इसके चलते किसानों का दशहरा जहां फीका रहा तो वहीं दिवाली भी उदास है। अब किसानों को बस अगली फसल बोने के लिए लागत जुटाने की आस है।

जिले में 1.04 लाख हेक्टेयर में किसान की धान की खेती करते हैं। इस बार किसानों को अच्छी उपज की उम्मीद थी। बाढ़ प्रभावित गांवों को छोड़ दें तो अन्य क्षेत्रों में फसल भी अच्छी हुई थी। फसल देखकर किसानों को उम्मीद थी कि इस बार दशहरा और दिवाली अच्छी मनेगी। लेकिन, एन वक्त पर हुई बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बीते सप्ताह हुई जोरदार बारिश और बूंदाबांदी से धान की फसल भीग गई। इससे धान बदरंग होने के साथ ही गीला हो गया। यहां तक कि जो धान मंडी में पहुंच गया था, वह भी जलभराव के चलते बर्बाद हो गया। किसी तरह किसानों ने धान सुखाने का प्रयास भी किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। गीला धान काल पड़ने के साथ ही अंकुरित भी होने लगा है। इसके चलते व्यापारी खरीद में आनाकानी कर रहे हैं। बारिश से पहले जो धान 3500 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था, उसकी कीमतें अब 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गईं हैं। इससे किसानों को मुनाफा तो दूर लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। नवीन मंडी में फरह क्षेत्र से धान बेचने आए किसान चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि एक बीघा में अधिकतम चार से पांच क्विंटल धान की पैदावार होती है। इस बार कीमतें कम होने से प्रति बीघा छह से सात हजार रुपये का ही धान बिक रहा है, इससे अधिक तो किसानों की लागत है। जिन किसानों का धान भीगने से बच गया, उन्हें तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल तक के दाम मिल रहे हैं। कीमतें कम होने से परेशान कई किसान तो मंडी से धान लौटाकर ले जा रहे हैं। उन्हें आगे कीमतें बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन हर किसान के लिए यह संभव नहीं है। दरअसल, किसानों को रबी की फसल की बुवाई करनी है। ऐसे में खेतों की जुताई, खाद, बीज और मजदूरी के लिए रुपयों की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए किसानों को मजबूरी में धान का विक्रय करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ व्यापारियों का कहना है कि वे गीला और बदरंग धान अगर ऊंची कीमतों पर खरीदेंगे तो उसे बेचेंगे कहां। धान बदरंग होने से चावल की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है, इसके कारण उनके सामने भी कीमतों का संकट है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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