हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में श्रीआचार्य पीठ के श्रीमद्भागवत सेवा संस्थान में आयोजित विराट संत-विद्वत सम्मेलन में अनेक विद्वानों ने अपने व्यक्त किए। स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज एवं सुतीक्ष्णदास महाराज ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि भगवान नारायण ही परमोपास्य तत्व हैं और भक्तजन भक्ति के माध्यम से उनके सान्निध्य को प्राप्त करते हैं। बाबा बलरामदास महाराज एवं स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने स्वामी किशोरी रमणाचार्य महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें धर्म और अध्यात्म की अमूल्य विभूति बताया। गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक अनिरुद्धाचार्य महाराज एवं वानप्रस्थ धाम के संस्थापक डॉ. चतुर नारायण पाराशर महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण को ऐसा ग्रंथ बताया, जिसका श्रवण, वाचन और मनन जीव के कल्याण का माध्यम है। स्वामी यदुनंदनाचार्य महाराज ने बताया कि यह परंपरा स्वामी किशोरी रमणाचार्य द्वारा 50 वर्ष पूर्व प्रारंभ की गई थी। आचार्य रामविलास चतुर्वेदी एवं आचार्य नागेंद्र गौड़ ने श्रीराधा रानी को अखिल ब्रह्मांड की आल्हादिनी शक्ति बताते हुए कहा कि सम्पूर्ण ब्रजमंडल में उनका साम्राज्य है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज (निरंजनी अखाड़ा, हरिद्वार), स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज (जूना अखाड़ा), तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज, पं. धीरेन्द्र शास्त्री (बागेश्वर धाम), स्वामी राघवाचार्य महाराज व स्वामी गुरु शरणानंद महाराज ने भी अपने विचार रखे। महोत्सव में महंत लाडली शरण महाराज, डॉ. केशवाचार्य महाराज, पं. विनोद मिश्र, डॉ. राधाकांत शर्मा, डॉ. रामसुदर्शन मिश्र, पं. जयदेव श्रोत्रिय आदि ने भी विचार रखे।
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