हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। देश को आजाद कराने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मथुरा में पांच बार आगमन हुआ। चार बार वह अपनी मर्जी से मथुरा आए, लेकिन एक बार उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर मथुरा में रोका था। महात्मा गांधी ने ब्रजवासियों से आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। इसके बाद ब्रजवासियों में देश को आजाद कराने की ऐसा जुनून सवार हुआ जो कि देश की आजादी के बाद ही रुका। इतिहासकारों के अनुसार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मथुरा से काफी गहरा लगाव रहा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मथुरा में पहली बार 14 अप्रैल 1914 को मथुरा आए थे। इस दौरान गुरुकुल, रामकृष्ण मिशन आश्रम तथा राजा महेंद्र प्रताप का प्रेम महाविद्यालय का भ्रमण किया। सन 1919 में आतंकवादी अपराध अधिनियम (काला कानून) के खिलाफ गांधीजी के आह्वान पर देशभर में हड़ताल हुई। गांधीजी मुंबई से दिल्ली, अमृतसर की रेल यात्रा पर निकले। नौ अप्रैल 1919 को अंग्रेजों ने उन्हें मथुरा स्टेशन पर गिरफ्तार करने का प्रयास किया, लेकिन बापू को देखने के लिए उमड़े जनसमूह के कारण वह सफल नहीं हो सके। उन्हें पलवल रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया और मथुरा लाया गया। रात होने पर मथुरा में गांधीजी को बैरक में रखा गया। अगले दिन सुबह 4 बजे उन्हें राजस्थान जाने वाली ट्रेन में बिठाया गया। तीसरी बार सन 1921 में गुरु नानक नगर में हुए प्रांतीय राजनीतिक कांफ्रेंस में बापू शामिल हुए। उन्होंने पुराने शहर मथुरा के बीच पार्क में आंदोलनकारियों के आमरण अनशन करने वाले आंदोलनकारियों को संबोधित किया था। अब इस स्थान को गांधी पार्क के नाम से पहचाना जाता है। चौथी बार 1927 में राजा महेंद्र प्रताप के चित्र का अनावरण करने के लिए मथुरा आए। पांचवीं बार छह नवंबर 1929 को डैंपियर नगर में बापू ने जन समूह को संबोधित किया था। यहां बापू ने खादी पहनने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने महावन, कारब, बलदेव, सादाबाद, कोसी, राया का दौरा किया और (रंगेश्वर स्थित पुराने पोस्ट ऑफिस) की दूसरी मंजिल के कमरे में रुके थे।
7455095736
Author: Vijay Singhal
50% LikesVS
50% Dislikes
