हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा निवेश करते हुए सरकार ने वृंदावन में 12 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय डिग्री कॉलेज का निर्माण कराया। कॉलेज तैयार हो गया और प्रधानाचार्य से लेकर शिक्षकों तक की तैनाती भी हो गईं, लेकिन छात्रों का प्रवेश कराने में उनकी सांस फूल गई। तमाम जद्दोजहद के बावजूद 780 सीटों पर मात्र छह ही प्रवेश हो पाए हैं। जबकि डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश के लिए किए जा रहे रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। कॉलेज में बीए की 420, बीएससी मैथ्स व बायोलॉजी की 140-140 और बीकॉम की 80 सीटें हैं। विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित है, लेकिन अब तक बीएससी और बीकॉम में एक भी दाखिला नहीं हुआ है। सिर्फ बीए में छह छात्रों ने पंजीकरण कराया है। उनकी फीस भी जमा हो गई है। कॉलेज की फीस की बात की जाए तो वह भी बेहद कम है। बीएससी बायो की फीस 4700 रुपये है, जबकि अन्य पाठ्यक्रमों की फीस 4000 से कम है। वहीं लड़कियों और आरक्षित वर्ग के लिए कुछ अन्य छूट भी हैं। इसके बावजूद यहां प्रवेश लेने में विद्यार्थियों का रुझान नहीं दिख रहा है। कॉलेज तक जाने का रास्ता भी यहां बड़ी समस्या बना हुआ है। रास्ते में काशीराम योजना के तहत बने आवासों के आसपास का माहौल विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं के लिए असुरक्षित बताया जा रहा है। प्रधानाचार्य डा. विनय चौधरी का कहना है कि कई बच्चों ने उनसे कहा है कि कॉलेज में आने जाने का रास्ता सुरक्षित नहीं है। यहां नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। कई छात्राओं ने बताया कि वे पढ़ाई करना चाहती हैं, लेकिन रास्ते की स्थिति और असुरक्षा के कारण उनके परिजन उन्हें कॉलेज भेजने में हिचकिचा रहे हैं।
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Author: Vijay Singhal
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