हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ब्रज की तरह उसकी होली भी अद्भुत है। अबीर-गुलाल के साथ यहां राग से भी फाग खेला जाता है। ठाकुरजी रसिया फाल्गुन में इसी का आनंद ले रहे हैं। फाग के रंग में ठाकुरजी को रंगने के लिए रसिक होली के रसिया और पदों का गायन कर रहे हैं। द्वापर में बालकृष्ण ने जो होली लीला की, उसे राग में पिरोकर उन्हें रिझाया जा रहा है।
ब्रज के मंदिरों में गाए जाने वाले पदों में होली का रंग बरस रहा है और अपना रसिया हुलस (आनंद) रहा है। मथुरा के पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के द्वारिकाधीश मंदिर में माघी पूर्णिमा से होरी के रसिया का रस बरस रहा है। यहां एक बोल बौलो नद नंदन तो खेलौ तुम संग होरी, लाल गुलाल हमारी आंखिन में जिन डारौ जू, आयौ फागुन मास कहै सब होरी होरा, मेरी चुनर में लग गयो दाग री श्याम ऐसो चटक रंग डारो, आज ब्रज में होरी रे रसिया, सब जग होरी और ब्रज होरा आदि पदों व गीतों से होली का उल्लास है। दर्शन को आए श्रद्धालु होरी के इस रस में सराबोर होकर थिरकने लगते हैं। द्वारिकाधीश मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि मंदिर का इतिहास लगभग 215 साल पुराना है। तभी से यहां रसिया गायन होता आ रहा है। 12 फरवरी से शुरू हुए रसिया गायन का सिलसिला 14 मार्च तक चलेगा।
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Author: Vijay Singhal
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