हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें एक 90 वर्षीय सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता को चार बैंकों में सात करोड़ रुपये की ठगी का सामना करना पड़ा। यह धोखाधड़ी पटना निवासी एक व्यक्ति ने बैंककर्मियों के साथ मिलकर की। आरोप है कि इस व्यक्ति ने फर्जी हस्ताक्षर कर बैंकों से धीरे-धीरे सारी राशि निकाल ली। घटना के अनुसार, पटना निवासी विश्वामित्र भारती सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रहे हैं। पिछले 12 वर्षों से वृंदावन में कृष्ण भक्ति में लीन हैं। उन्होंने सात साल पहले दिल्ली में स्थित अपना मकान सात करोड़ रुपये में बेचा था। इन पैसों को उन्होंने विभिन्न बैंकों में जमा किया था। चार करोड़ रुपये उन्होंने फरीदाबाद की एचडीएफसी बैंक में जमा किए, जबकि 80 लाख रुपये एचडीएफसी बैंक शाखा वृंदावन, डेढ़ करोड़ रुपये एक्सिस बैंक वृंदावन और करीब 80 लाख रुपये इंडियन बैंक वृंदावन में जमा किए थे। कुछ समय बाद वह अपनी तबीयत बिगड़ने के कारण पटना चले गए। एक साल पहले जब उनकी तबीयत में कुछ सुधार हुआ तो वह वृंदावन लौट आए। यहां वापस आकर जब उन्होंने अपने बैंक खातों की जांच की तो उनके होश उड़ गए। पता चला कि उनके जमा किए गए सारे पैसे निकाल लिए गए थे। उनके पास जमा राशि की रसीदें भी मौजूद थीं, जिनके आधार पर उन्होंने बैंकों से जवाब मांगा।वर्षों तक खाता संचालन करने के बाद उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि उनके पैसे कैसे गायब हो गए। तब उन्हें पता चला कि पटना का ही उनका परिचित अभिषेक और उसके दोस्त, साथ ही कुछ बैंककर्मी मिलकर उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बैंकों से पैसा निकालते रहे थे। यह जानकारी मिलने के बाद उन्होंने वृंदावन थाने में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। वृंदावन थाने के प्रभारी रवि त्यागी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला धोखाधड़ी का प्रतीत हो रहा है। रिपोर्ट दर्ज कर मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस इस मामले में आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है, जबकि बैंककर्मियों और अन्य आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।
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Author: Vijay Singhal
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