हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। डिपो की 25 रोडवेज बसें कंडम (खटारा) घोषित होने के बाद भी सड़कों पर दौड़ाई जा रहीं हैं। इस कारण यात्रियों की जान सदैव खतरे में रहती है। कंडम हो चुकी बसों को लोकल रूटों पर चलाया जा रहा है। ये कब कहां खड़ी हो जाएं किसी को नहीं पता।बरोडवेज मुख्यालय ने हाल ही में मथुरा डिपो को करीब 74 नई बसें दीं हैं। वर्तमान में डिपो के बेड़े में 69 अनुबंधित समेत 168 रोडवेज बसें हैं। इनमें से 25 पिछले एक माह में कंडम घोषित की जा चुकीं हैं। ऐसे में जान जोखिम में डालकर यात्री सफर करने को मजबूर हैं। इन बसों को आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, वृंदावन और सौंख के रूटों पर चलाया जा रहा है।
अक्सर राह में खराब हो जातीं हैं ये बसें
नियमानुसार रोडवेज की बसों को 8 साल या 8 लाख किमी चलाया जाता है। यह अवधि पूरी होते ही उन्हें कंडम घोषित कर दिया जाता है। नई बसें न आने से डिपो कंडम घोषित बसें 10 लाख किमी से अधिक चलाई जा चुकीं हैं। नाम न छापने की शर्त पर चालकों ने बताया है कि नियमानुसार कंडम घोषित बसों को सड़कों पर नहीं चलाना चाहिए। इसके बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दें रहे हैं। इन बसों से रोडवेज को आए दिन नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई बसें रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। जिससे यात्रियों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है। मदन मोहन शर्मा, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम ने कहा, कंडम हो चुकी बसों को लेकर रोडवेज मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है। निविदा स्वीकृत होने के बाद जल्दी ही इन्हें नीलाम किया जाएगा। इनकी जगह नई बसों को बेड़े में शामिल किया जाएगा।
नियमानुसार रोडवेज की बसों को 8 साल या 8 लाख किमी चलाया जाता है। यह अवधि पूरी होते ही उन्हें कंडम घोषित कर दिया जाता है। नई बसें न आने से डिपो कंडम घोषित बसें 10 लाख किमी से अधिक चलाई जा चुकीं हैं। नाम न छापने की शर्त पर चालकों ने बताया है कि नियमानुसार कंडम घोषित बसों को सड़कों पर नहीं चलाना चाहिए। इसके बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दें रहे हैं। इन बसों से रोडवेज को आए दिन नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई बसें रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। जिससे यात्रियों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है। मदन मोहन शर्मा, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम ने कहा, कंडम हो चुकी बसों को लेकर रोडवेज मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है। निविदा स्वीकृत होने के बाद जल्दी ही इन्हें नीलाम किया जाएगा। इनकी जगह नई बसों को बेड़े में शामिल किया जाएगा।
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Author: Vijay Singhal
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