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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर पहुंची भक्तों की भारी भीड़, आगरा की युवती दम घुटने से बेहोश

ByVijay Singhal

Apr 2, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सोमवार को भी भक्तों की भीड़ उमड़ी। मंदिर के अंदर और बाहर पैर रखने की भी जगह नहीं बची। भीड़ में फंसकर आगरा की एक युवती दम घुटने से बेहोश हो गई। उसे मंदिर परिसर में ही चिकित्सकों ने उपचार दिया। भीड़ में फंसे कई श्रद्धालुओं की हालत खराब हुई। सुबह से रात तक मंदिर के हालात खराब रहे। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में पिछले चार दिन से भक्तों की भीड़ बढ़ रही है। तीन दिन की छुट्टियों के बाद सोमवार को भी भीड़ का दबाव दर्शन खुलने से पहले ही बनने लगा। मंदिर के पट खुले तो श्रद्धालुओं में आपाधापी का माहौल बनने लगा। दोपहर को मंदिर प्रांगण में भीड़ के दबाव में फंसी आगरा के दयालबाग निवासी 24 वर्षीय आस्था उपाध्याय दम घुटने के कारण बेहोश हो गईं। आस्था के पिता हरेंद्र उपाध्याय ने सुरक्षागार्डों से मदद मांगी। गार्डों ने स्वजन की मदद से आस्था को मंदिर के चबूतरे पर मौजूद चिकित्सकों के पास पहुंचाया। यहां उनका उपचार हुआ। ब्रज में होली का उल्लास वसंत पंचमी पर ठाकुर बांकेबिहारीजी महाराज भक्तों संग होली खेलकर की थी। होली का समापन भगवान रंगनाथ ने सोमवार को भक्तों संग रंगों की होली खेलकर किया। रंगजी मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव में जब सोने के कांच के विमान में बैठ भगवान रंगनाथ ने मंदिर के बाहर निकल भक्तों के संग होली खेली तो माहौल पूरी तरह उल्लास मय हो गया। शोभायात्रा में हुई लठामार होली में महिलाओं ने जमकर लाठियां बरसाईं। दक्षिण भारतीय परंपरा के संवाहक रंगजी मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव में सोमवार को ब्रज की होली का अनोखा नजारा देखने को मिला। हर दिन अलग-अलग वाहनों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे ठा. गोदारंगमन्नार हुरियारे बन कांच के विमान में विराजमान हो मंदिर से निकले तो भक्तों संग जमकर होली का आनंद लिया। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सोमवार को मंदिर सेवायतों ने आराध्य को कांच के विमान में विराजमान कराया, तो जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। मंदिर प्रांगण में फूलों की होली के साथ शुरू हुई सवारी धीरे-धीरे सवारी आगे बढ़ी तो भक्तों की भीड़ भी बढऩे लगी। रंगजी मंदिर से लेकर नगर निगम चौराहा तक हर ओर भक्तों की भीड़ और उड़ते गुलाल ने एकबार फिर शहर को होली के रंग में रंग दिया। करीब एक घंटे में बड़ा बगीचा पहुंची सवारी, फिर वहां ठाकुरजी को विश्राम कराया गया। यहां आरती के बाद एकबार फिर ठाकुरजी निकले भक्तों संग होली खेलने। देर शाम विशालकाय चांदी के हाथी पर सवार होकर ठाकुरजी नगर भ्रमण को निकले तो नगरवासियों ने जगह-जगह आरती उतारकर उनका पूजन किया।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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