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भाइयों को गांजा, ननद-भाभी को शराब में जेल, आगरा में पुलिस का अजब खेल, ऐसे हो गया खुलासा, SO समेत 4 नपे

ByVijay Singhal

Jan 6, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
आगरा। कमिश्नरेट बनने के बाद पुलिस के कारनामे लगातार सामने आ रहे हैं। इस बार करोड़ों की जमीन पर फिल्मी अंदाज में कब्जा दिलाने का मामला डीजीपी ऑफिस तक पहुंचा तो खलबली मच गई। तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार (वर्तमान एमएम गेट) सहित चार पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं। जमीन पर सालों से रह रहे सगे भाइयों और उनके परिवार की महिलाओं के खिलाफ दो मुकदमे लिखे गए। पहले गांजे में सगे भाई जेल भेजे गए। उसके बाद अवैध शराब में ननद-भाभी जेल गईं। जगह खाली हो गई। बाउंड्रीवाल बन गई। गेट चढ़ गया। सीसीटीवी कैमरे लग गए। गार्ड तैनात कर दिए गए।
बेश्कीमती करीब दस हजार गज जमीन जगदीशपुरा इलाके में बैनारा फैक्ट्री के निकट बीएस कॉम्पलेक्स के पास है। वर्ष 1974 में जमीन पर दो लोगों ने पार्टनशिप में मील लगाई थी। कुछ साल बाद ही बंद हो गई। जमीन को लेकर जयपुर हाउस निवासी नेम चंद जैन का दूसरे पक्ष से विवाद चल रहा है। एक पक्ष ने जमीन पर कई दशक पहले केयरटेकर के रूप में रवि कुशवाह उसके भाई संकरिया कुशवाह पुत्र दीनानाथ को रख रखा था। रवि की पत्नी पूनम और ननद पुष्पा भी वहां रहती थीं। बेश्कीमती जमीन पर नेमचंद जैन को कब्जा लेना था। वह अकेले यह काम करने में सक्षम नहीं थे। कई नामी लोग उनके साथ मिल गए। उसके बाद शुरू हुआ खेल। एक चर्चित ने इस खेल में अहम भूमिका निभाई। जमीन पर जो लोग रह रहे थे उन्हें वहां से हटाया जाना था। ताकि जमीन पर कब्जा लिया जाए।

आरोप है कि इस खेल में जगदीशपुरा पुलिस मोहरा बनी। फिल्मी अंदाज में पूरा काम कराया गया। पहला मुकदमा 26 अगस्त 2023 को एनडीपीएस एक्ट का लिखा गया। पुलिस ने मौके से रवि कुशवाह, संकरिया और जटपुरा निवासी ओमप्रकाश को पकड़ा। एक वाहन बरामद दिखाया। उसकी नंबर प्लेट फर्जी बताई गई। तीन पैकेट में नौ किलोग्राम गांजा बरामद दर्शाया गया। तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया। मुकदमे में अरुण को फरार दिखाया गया। जो आज तक नहीं पकड़ा गया। नौ अक्तूबर को उसी जगह आबकारी निरीक्षक ने छापा मारा। मौके पर रह रहीं पूनम और उसकी नदद पुष्पा व फुरकान को पकड़ा। जगदीशपुरा थाने में आबकारी अधिनियम का मुकदमा लिखा गया। धोखाधड़ी की धाराएं भी लगाई गईं। तीनों को जेल भेजा गया। जगह खाली हो गई। उसके बाद वहां रातों रात काम चला। जगह-जगह से टूटी पड़ी बाउंड्रीवाल बनवाई गई। उस पर पुताई कराई गई। सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। दो सिक्योरिटी गार्ड तैनात कर दिए गए। जमीन पर कब्जा दिलाने में मदद करने वाले नामी लोग अब वहां प्लाट काट रहे हैं।

इनका हुआ निलंबन
डीसीपी सिटी सूरज राय की रिपोर्ट पर पुलिस आयुक्त ने तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा वर्तमान एसओ एमएम गेट जितेंद्र कुमार, मुख्य आरक्षी उपेंद्र मिश्रा, शिवराज सिंह व आरक्षी रविकांत को निलंबित किया है। एनडीपीएस का मुकदमा एसओ विकास कुमार ने लिखाया था। उनका स्थानांतरण सहारनपुर हो चुका है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए वहां रिपोर्ट भेजी जा रही है।

डीजीपी ऑफिस तक पहुंचा मामला
खेल कमिश्नरेट में हुआ था। यहां शिकायत होती तो दाखिल दफ्तर कर दी जाती। यह मानते हुए शिकायत सीधे डीजीपी ऑफिस में की गई। डीजीपी ऑफिस से एक एसपी रैंक के अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच अधिकारी पिछले दिनों आगरा आए। मौके पर गए। फोटोग्राफ लिए।

कुछ पुलिसकर्मियों से बातचीत की। कुछ से फोन पर संपर्क किया। उसके बाद वापस लौट गए। मामला डीजीपी ऑफिस तक पहुंचने के बाद अधिकारियों को लगा कि मामला तूल पकड़ सकता है। आनन-फानन में शुक्रवार की रात कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

खेल में आ रहा है एक चर्चित का नाम
कमिश्नरेट में खासी चर्चाओं में रहने वाले एक चर्चित का नाम इस मामले में आ रहा है। लोग यह बोल रहे हैं कि काम आसान नहीं था। सालों से जमे परिवार को जमीन से हटाना था। पुलिस की मदद के बिना संभव नहीं था। कोर्ट का कोई स्पष्ट आदेश नहीं था। चर्चित ने ठेका लिया था। उसने ही रास्ता दिखाया। चर्चाएं तो बड़े खेल कि हैं, मगर इसे किसी के प्रमाण पुख्ता प्रमाण नहीं है। अधिकारी भी अब तो यह मान रहे हैं कि बिना निजी हित के पुलिस इतना बड़ा काम नहीं कराएगी।

डीसीपी ने दी रिपोर्ट, भूमिका संदिग्ध माना
पूरे प्रकरण में डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह को एक रिपोर्ट दी। जिसमें तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार और एनडीपीएस एक्ट के मुकदमे की फर्द में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका को संदिग्ध माना। यह लिखा कि जमीन पर कब्जा कराने में इनकी भूमिका की गहराई से जांच जरूरी है।

पहला थाना मिला था जगदीशपुरा
जितेंद्र कुमार के खिलाफ यह कोई पहली शिकायत नहीं है। कुछ खास लोगों की मेहरबानी से उन्हें जगदीशपुरा थाने का चार्ज मिला था। पूर्व में वह रुनकता चौकी पर तैनात रहे थे। वहां आगजनी में निलंबित हुए थे। सांप्रदायिक माहौल गर्माया था। बहाल होने के बाद देहात में तैनाती मिली थी। वहां से सीधे जगदीशपुरा थाने का चार्ज मिला था।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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