हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। 2016 में जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए मथुरा के लाल बबलू सिंह के स्मारक पर अब आर्मी टैंक रखा जाएगा। शहीद बबलू सिंह के स्मारक पर आर्मी टैंक रखे जाने की मांग परिवार 2019 से कर रहा था। परिवार की मांग पर केंद्र सरकार और सेना ने स्मारक पर T-55 टैंक रखने का आदेश दिया है। सेना की 18वीं जाट बटालियन में 2005 में भर्ती हुए बबलू सिंह फरह ब्लॉक के गांव झंडीपुर के रहने वाले थे। बबलू सिंह को 2016 में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान से निपटने के लिए 61वीं राष्ट्रीय राइफल में नियुक्त कर दिया गया। 29 व 30 जुलाई की रात नौगांव सेक्टर में आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की। जहां बबलू सिंह, नायक विजेंद्र सिंह ,सिपाही विशाल चौधरी गश्त कर रहे थे। नियंत्रण रेखा पर तारबंदी के नीचे से घुसपैठ की कोशिश कर रहे घुसपैठियों में सेना के जवानों को देखते ही फायरिंग कर दी। सेना के जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की और आतंकियों को मार गिराया। लेकिन उससे पहले बबलू सिंह को भी गोली लग चुकी थी। बबलू सिंह ने घायल होते हुए अपने दोनों साथियों को बचा लिया लेकिन खुद का बलिदान देने से नहीं रोक सके। बबलू सिंह की इस बहादुरी, अदम्य साहस के देखते हुए सरकार ने उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया। शहीद बबलू सिंह की शहादत को यादगार बनाने और युवाओं में सेना में जाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बबलू सिंह के परिवार ने 2019 में स्मारक स्थल पर आर्मी का पुराना टैंक रखवाने की मांग की। परिवार की मांग पर शहीद के परिवार से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। परिवार ने दिल्ली,लखनऊ तक दौड़ लगाई। मथुरा डीएम के साथ-साथ जन प्रतिनिधियों को पत्र दिए। इसका परिणाम यह हुआ कि 4 साल बाद परिवार की मेहनत रंग लाई। स्मारक स्थल पर अब पुराना T 55 टैंक रखा जायेगा। शहीद बबलू सिंह के भाई सतीश सिंह ने बताया, इससे युद्ध व शांतिकाल में शहीद हुए सैनिक जिन्हें अदम्य साहस,पराक्रम व बहादुरी के लिए विभिन्न अवसरों पर याद किया जाता है उन सभी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इसके साथ ही क्षेत्रीय युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए भारतीय सेना में जाने के लिए प्रेरणा मिलेगी शहीद स्मारक पर रखा जाने वाला टैंक T-55 रूस निर्मित है। इस टैंक की 1965 और 1971 में हुए युद्ध में अहम भूमिका रही। शहीद बबलू सिंह के स्मारक पर टैंक रखने का आदेश मिलने के बाद परिवार में खुशी है। शहीद बबलू सिंह के भाई ने बताया, वह अपने भाई के लिए कुछ ऐसा करना चाहते थे जो यादगार हो। यही सोचकर प्रयास किया और सफलता मिली।
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Author: Vijay Singhal
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