हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में भगवान बांके बिहारी जी महाराज हरियाली तीज पर्व 19 अगस्त को स्वर्ण रजत निर्मित बेशकीमती हिंडोले (झूला) में विराजमान होंगे। बांके बिहारी जी का यह झूला खासियतों को समेटे हुए है। अदभुत झूले में वर्ष में एक बार विराजमान भगवान बांके बिहारी को प्रेम और आस्था की डोर से झूला झुलाने के लिए देश विदेश से भक्त बड़ी संख्या में वृंदावन पहुंचेंगे।
विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी जी का झूला जितना अदभुत है उतना ही ऐतिहासिक भी है। यहां झूला बनाने की शुरुआत 1942 में हुई थी। 5 साल की कारीगरों द्वारा की गई मेहनत के बाद यह झूला 15 अगस्त 1947 में बनकर तैयार हुआ। इस दिन हरियाली तीज का पर्व भी था। इसलिए भगवान बांके बिहारी पहली बार इस झूले में देश को मिली आजादी के दिन ही विराजमान हुए थे। बांके बिहारी जी के लिए झूला मंदिर का निर्माण कराने वाले सेठ हरगुलाल बेरीवाला के परिवार ने भगवान की सेवा में यह झूला बनवाया और उनको अर्पित किया। बेरीवाला परिवार ने इस झूले को बनाने का ऑर्डर बनारस के कारीगरों को दिया। जिसके लिए टनकपुर के पास स्थित जंगल से शीशम की लकड़ी मंगाई गई।2 वर्ष तक लकड़ी को सुखाया गया। इसके बाद 25 कारीगरों ने मेहनत कर झूले का निर्माण शुरू किया। पहले लकड़ी पर कारीगरी कर झूला तैयार किया गया। इसके बाद इस पर 20 किलो सोना और 100 किलो चांदी की परत चढ़ाई गई। जन- जन के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी लाल वर्ष में केवल एक बार श्रावण मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर स्वर्ण रजत निर्मित अमूल्य हिंडोले पर विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देते है। जिसकी एक झलक पाने के लिए देश भर के दूर दराज इलाको से लाखों की संख्या में भक्त वृंदावन आते है। भक्तों को दर्शन देने के लिये भगवान अपने पूर्ण वैभव के साथ हिंडोले में विराजमान होते हैं। भगवान बांके बिहारी जी का यह बेशकीमती झूला अपने आप मे कई खासियत समेटे हुए है। इस हिंडोले का आकर्षण आज भी वैसा ही बना हुआ है जैसा पहली बार था। हिंडोले के ऊपरी हिस्से पर की गई पच्चीकारी अपने आप मे अद्भुत है। हिंडोले के दोनों और आदमकद सखियों की प्रतिमाएं बरबस ही भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। हिंडोले पर विराजमान ठाकुर जी के श्रीविग्रह को सुगन्धित इत्रों की मालिश कर रेशम से कढ़े हरे रंग के वस्त्र धारण कराये जाते है। भगवान बांके बिहारी जी का यह बेशकीमती झूला अपने आप मे कई खासियत समेटे हुए है। इस हिंडोले का आकर्षण आज भी वैसा ही बना हुआ है जैसा पहली बार था। हिंडोले के ऊपरी हिस्से पर की गई पच्चीकारी अपने आप मे अद्भुत है। हिंडोले के दोनों और आदमकद सखियों की प्रतिमाएं बरबस ही भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। हिंडोले पर विराजमान ठाकुर जी के श्रीविग्रह को सुगन्धित इत्रों की मालिश कर रेशम से कढ़े हरे रंग के वस्त्र धारण कराये जाते है।
7455095736
Author: Vijay Singhal
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