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जिलाधिकारी महोदय यहां भी ध्यान आकर्षित करें, यह है पौराणिक स्थल कंसखार

ByVijay Singhal

Aug 11, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल

मथुरा वृन्दावन महानगर नये परिवेश में सजाया जा रहा है,तो मन करता है कि प्राचीन ऐतिहासिक पौराणिक स्थलों का भी उचित संरक्षण, रखरखाव और सौन्दर्य करण हो। ऐसा ही प्राचीन स्थल है मथुरा पुरी के हृदय स्थल क्षेत्र में कंसखार घंटाघर जो कि पौराणिक ऐतिहासिक महत्व का स्थल है। मथुरा पुरी कंस के अत्याचार से पीड़ित थी ,उस कंस का वध करने के लिए योगीराज श्री कृष्ण ने मथुरा पुरी में अवतार लिया, सम्पूर्ण बृज मंडल में प्रकृति संरक्षण,गौ संरक्षण का संदेश देती हुई लीलाओं को करते करते श्री कृष्ण का आगमन मथुरा पुरी में हुआ। भगवान श्री कृष्ण बलराम ने कंस का वध उसके अखाड़े कंस टीला पर किया ( जो कि वर्तमान में प्राचीन रंगेश्वर महादेव मंदिर के पास है) और उसका वध करने के बाद उसको माथुर चतुर्वेदी ब्राह्मणों के सहयोग से घसीटते हुए कंसखार यमुना तट तक लाये और उसको यमुना में प्रवाहित किया ऐसी मान्यता है और वर्णन है। और उसके पश्चात पुण्य तीर्थ विश्राम घाट पर विश्राम किया। आज भी कार्तिक शुक्ल पक्ष दशमी के दिन यह उत्सव माथुर चतुर्वेदी ब्राह्मणों द्वारा मनाया जाता है।कंसखार वहीं पौराणिक स्थल है, जहां कस को लाठियों से कूटा गया था। इस पौराणिक स्थल पर एक प्राचीन घंटाघर है जो आज जीर्णोद्धार की मांग कर रहा है,आज से लगभग 30/35 पूर्व स्थानीय व्यवसायियों के सहयोग से इसका जीर्णोद्धार किया गया था जिसमें,सुंदर कंस वध की लीला और श्री यमुना जी, श्री नाथ जी, महाप्रभु जी के सुंदर छवि मूर्ति चित्रकारी के रूप में बनायी गयी जो आज भी मौजूद है,एक पानी की प्याऊ का भी निर्माण किया गया था।लेकिन कालांतर में यह सब जीर्ण हो चुका है आज इसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता है।स्थानीय निवर्तमान पार्षद रामदास चतुर्वेदी के अनुसार अनेकों बार इसका संज्ञान उत्तर प्रदेश बृज तीर्थ विकास ट्रस्ट के उपाध्यक्ष श्री शैलजाकान्त जी को कराया है,पूर्व महापौर मुकेश आर्यबंधु ने अनेकों बार निरीक्षण करके इसके जीर्णोद्धार के आदेश दिए। तत्कालीन नगर आयुक्त रविन्द्र मांदड ने भी अधीनस्थ अधिकारियों को इसके जीर्णोद्धार की योजना बनाने के आदेश दिए। वर्तमान नगर आयुक्त महोदय ने भी गत सितंबर 2022 में इसके जीर्णोद्धार करवाने के आदेश पारित करते हुए सर्वेक्षण करवाया और एस्टीमेट तैयार करवाया।आज भी वह एस्टीमेट नगर निगम के कार्यालय में फाइलों में सुरक्षित है। लेकिन यह कारण आज तक ज्ञात नहीं हो पाया कोशिश सबने की लेकिन कार्य नहीं हो पाया। अब जब शहर में तेजी से प्रमुख चौराहों का सौन्दर्यीकरण चल रहा है तो विषय ध्यान में आ गया,शायद जिलाधिकारी महोदय के संज्ञान में यह प्राचीन स्थल भी ध्यान आकर्षित कर लें।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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