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जिला अस्पताल में एप से बनेंगे पर्चेमरीज को इलाज मिलने में नहीं होगी देरी

ByVijay Singhal

Aug 7, 2023
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हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अब पर्चा बनवाने के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। मरीज अब घर बैठे ही अपना पर्चा डिजिटल तकनीक का प्रयोग कर बना सकता है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों की सहूलियत के लिए जल्द ही एप लाने जा रहा है। जिसके जरिए पर्चा बनवाया जा सकेगा।
मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल में इलाज के लिए दूर दूर से मरीज आते हैं। यहां उनको इलाज कराने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। जिसके लिए उन्हें पर्चा बनवाना पड़ता है। पर्चा बनवाने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। जिसमें काफी समय लगता है। मथुरा के जिला अस्पताल में प्रतिदिन 600 से ज्यादा मरीज आते हैं। यहां पर्चा बनाने के लिए 4 विंडो हैं। जिसमें से 2 पुरुषों की और 2 महिलाओं की। मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण यहां पर्चा बनवाने के लिए लाइन लगाई जाती है। जो कई बार काफी लंबी हो जाती है। लाइन में लगने के कारण 2 से 3 घंटे में मरीज का नंबर आता है जिसके बाद पर्चा बनता है। दो से 3 घंटे तक लाइन में लगने के कारण कई बार डॉक्टर चले जाते हैं। जिससे मरीज को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीजों को होने वाली दिक्कत को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब एक एप लाने जा रहा है। जिसके जरिए मरीज घर बैठे ही अपना पर्चा बिना लाइन में लगे बनवा सकता है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर मुकुंद बंसल ने बताया कि आभा नाम का एप डाउनलोड करना होगा।एप गूगल प्ले स्टोर से डाउन लोड करना है। इसके बाद एप द्वारा मांगी जाने वाली जानकारियों को भरना होगा। सभी जानकारियां भरने के बाद मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा। ओटीपी भरने के बाद में आभा की ओर से रोगी की एक आईडी बन जाएगी। इस पर क्लिक करने के बाद एप खुल जाएगा। इस आभा को ओपन करने पर एप में ऊपर दाईं तरफ बार कोड स्कैन करने का विकल्प दिखाई देगा। जब भी आपको जिला अस्पताल जाकर अपना पर्चा बनवाना हो तो लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। काउंटर पर लगे बार कोड को आभा एप के स्कैनर से स्कैन करना है। स्कैन करते ही काउंटर पर बैठे कर्मचारी के पास आपकी डिटेल निकल कर आ जाएगी। आभा एप सिर्फ स्मार्ट फोन में ही डाउनलोड हो सकता है। ऐसे में की पैड वाले फोन में यह एप नहीं चल सकेगा। जबकि जिला अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले अधिकतर रोगी गरीबी रेखा के नीचे से आने वाले होते हैं। जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं होता है। उनके पास कीपैड वाला फोन होता है। ऐसे में वे इस एप का लाभ नहीं उठा सकेंगे।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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