हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा में पिछले कुछ दिनों से आम आदमी की किचिन में टमाटर ही नहीं अदरक और लहसुन भी गायब है। ये अपने एक माह पूर्व की कीमत से दो से तीन गुने मूल्य पर बिक रहे हैं। मध्यम और निम्न वर्ग की गृहणियां महंगी सब्जियों से दूरी बनाए हुए हैं। दूसरी ओर जानकार बताते हैं कि टमाटर तो बाढ़ की मार महंगा हो गया। बाढ़ से दूसरी कुछ सब्जियां भी महंगी हो सकती हैं। मगर दूसरे प्रांतों से आने वाली सब्जियां जैसे अदरक, प्याज और लहसून क्यों महंगे हुए के सवाल पर जानकार चुप्पी साध लेते हैं। जिला स्तरीय हाइवे स्थित फल एवं सब्जी मंडी में लौकी, आलू, नीबू, खीरा, हरी मिर्च, शिमला मिर्च और तोरई जैसी सब्जियों की आज और एक माह पूर्व की कीमतों में दो से तीन गुने का अंतर आ गया है। मंडी के थोक रेट और खुले बाजार में ढकेल पर बिकने वाली सब्जियों की कीमतों में भी काफी अंतर है। सब्जी मंडी के जानकार बताते हैं कि जिले के बाहर से आने वाली सब्जियों जैसे टमाटर और अन्य हरी सब्जी के दामों में बाढ़ के चलते उछाल हो सकता है, मगर अदरक, लहसुन और प्याज जैसे कुछ आइटमों में कीमत का उछाल मारना समझ से बाहर है। हाइवे स्थित फल एवं सब्जी मंडी में लहसुन 160 रुपये प्रति किग्रा, अदरक 200 रुपये प्रति किग्रा और प्याज 30 रुपये प्रति किग्रा थोक में बिक रही है। जो खुले बाजार में और भी महंगी मिलती हैं। जबकि इन तीनों की कीमत एक माह पूर्व तक आधे से भी कम पर थी।
फल एवं सब्जी विक्रेता एसोसिएशन के उपाध्यक्ष चौधरी जितेंद्र सिंह स्वीकारते हैं कि सब्जियों की कीमतों में उछाल एक माह पूर्व ही आया है। टमाटर और दूसरी सब्जियों की कीमत तो बाढ से प्रभावित हो सकती है। मगर लहसुन, प्याज और अदरक की कीमतें बेतहाशा क्यों बढ़ रही हैं, के सवाल पर वे निरुत्तर हो जाते हैं।
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Author: Vijay Singhal
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