हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा प्रसाद फेंककर चढ़ाने पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध शुरू हो गया है। मंदिर की हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों और सेवायत गोस्वामियों ने इस फैसले को अनुचित बताया है। उनका कहना है कि यह प्रतिबंध ब्रज के मंदिरों की परंपरा के खिलाफ है। कमेटी सदस्य रजत गोस्वामी ने कहा कि प्रसाद फेंकने की समस्या की जड़ में जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले मंदिर में छह भंडारी थे, लेकिन अब केवल दो भंडारी रह गए हैं। ये भंडारी ही श्रद्धालु और सेवायत गोस्वामी के बीच की कड़ी होते हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं का प्रसाद ठाकुरजी तक पहुंचता था। भंडारी कम होने से श्रद्धालु अपनी आस्था का प्रसाद ठाकुरजी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ब्रज के मंदिरों में घर से प्रसाद बनाकर लाने और आराध्य को अर्पित करने की पुरानी परंपरा है। गोस्वामी ने सवाल किया कि भक्तों द्वारा लाया गया फूलमाला प्रसाद चढ़ाना कब से दंडनीय हो गया। उन्होंने कमेटी के अध्यक्ष से इसका जवाब मांगा। उन्होंने यह भी कहा कि कमेटी ने मंदिर मार्गों के चौड़ीकरण और भीड़ नियंत्रण जैसे जरूरी कार्य नहीं किए। कमेटी सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि कमेटी ने श्रद्धालुओं को कोई सुविधा नहीं दी है। इसके बजाय प्रसाद लाने वालों को दंडित किया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि यह किस संविधान में लिखा है। गोस्वामी ने बताया कि कमेटी सदस्यों ने बैठक में भंडारियों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया था। इससे श्रद्धालुओं का प्रसाद ठाकुरजी तक आसानी से पहुंच पाता। भंडारी की संख्या कम होने से श्रद्धालु अपने आराध्य की ओर प्रसाद फेंकने को विवश हैं।
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श्रीबांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा प्रसाद फेंककर चढ़ाने पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध
