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राजकीय बाल ग्रह में ये कैसी काउंसिलिंग, नहीं आ रहा किशोरियों के व्यवहार में बदलाव

ByVijay Singhal

Aug 24, 2026
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के राजकीय बाल गृह बालिका में निरुद्ध किशोरियों के व्यवहार में सुधार और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काउंसिलिंग की व्यवस्था है। कागजों में तो यह बेहतर नजर आती है लेकिन हकीकत इससे अलग है। यही कारण है कि उनके व्यवहार में बदलाव नहीं आ पा रहा है। किशोरी की हत्या के बाद बाल गृह की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं कि यहां काउंसिलिंग की औपचारिकता निभाई जा रही है। रिटायर्ड सीओ बीएस त्यागी बताते हैं कि किशोरियों के मानसिक और व्यावहारिक बदलाव के लिए काउंसलर की भूमिका अहम होती है। किशोरियों को अपराध की वजह समझाने, गलत संगति से दूर रहने और भविष्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए काउंसिलिंग की जरूरत होती है। राजकीय बाल गृह के रिकॉर्ड में किशोरियों की काउंसिलिंग समेत विभिन्न गतिविधियों का ब्योरा दर्ज किया जाता है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि इन गतिविधियों का किशोरियों के व्यवहार और सोच पर कितना असर पड़ रहा है। रिटायर्ड सीओ का कहना है कि केवल कुछ समय बातचीत कर लेने से किशोरियों के व्यवहार में बदलाव संभव नहीं है। प्रत्येक किशोरी की परिस्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि और मानसिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग काउंसिलिंग की जरूरत होती है। इसके लिए नियमित फॉलोअप और काउंसलर की निरंतर मौजूदगी जरूरी है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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