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ब्रज विकास की दौड़ में पीछे छूटती बुनियादी सुविधाएं: चमकती सड़कें और रोपवे तो दिया, पर जाम और जलभराव से जूझ रहा मथुरा

ByVijay Singhal

Sep 14, 2026
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। काशी, अयोध्या और अब मथुरा, सरकार के एजेंडे में ब्रज का विकास है। उस ब्रज का जहां कान्हा का वास है। प्रिया-प्रियतम ने जहां अपनी लीलाएं कीं। सड़कें बनीं, रोशनी से जगमगाते भक्ति स्तंभ। भव्य द्वार और मंदिर। धर्म नगरी में बाहर से आने वाला श्रद्धालु खुश हैं। मगर, अभी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है। जाम और जलभराव से शहर को मुक्त करना जरूरी है। दस वर्षों में ब्रज में विकास का पहिया तेजी से घूमा। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जनसभाओं में ब्रज के विकास का संकल्प दोहराया। इस पर काम भी हुआ। आगरा-दिल्ली हाईवे से यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए सरकार ने 1650 करोड़ रुपये दिए। 23 करोड़ रुपये से वृंदावन से पानीगांव परिक्रमा मार्ग से तैयार रोशनी से नहाए भक्ति स्तंभ बने। बरसाना में राधारानी मंदिर के लिए रोपवे बना। अब परिक्रमा मार्ग का भी विकास हो रहा है। कान्हा का बचपन बीता, उस गोकुल में वसुदेव वाटिका में कृत्रिम झील का निर्माण हो रहा है। बलदेव में भी विकास की नई तस्वीर जल्द सामने आएगी। ब्रज की यह नई तस्वीर श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। ब्रज में बढ़ती सुविधाओं का ही असर है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष रिकार्ड 12 करोड़ श्रद्धालु ब्रज में आए। अब आगे संख्या बढ़ने की भी उम्मीद है। मगर, विकास की इस दौड़ में बुनियादी सुविधाएं कहीं पीछे छूट रही हैं। इसमें सबसे बड़ी समस्या बढ़ती भीड़ से लगने वाला जाम है। वृंदावन से लेकर मथुरा तक जाम से सड़कें कराह रही हैं। ब्रज में आने वाले श्रद्धालु घंटों वाहनों के जाम में जूझते हैं। सप्ताह के अंत में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है। इतने वर्षों में जिम्मेदार अच्छी ट्रैफिक व्यवस्था नहीं दे सके हैं। दूसरी बड़ी समस्या मथुरा शहर का ड्रेनेज सिस्टम है। थोड़ी बरसात में ही यहां की तमाम मुख्य मार्ग जलमग्न हो जाते हैं। रेलवे के अंडरपास में तो घुटनों तक पानी भर जाता है। सालों से यह समस्या चली आ रही है, मगर इसके हल की राह नहीं निकल सकी है। वृंदावन में श्रद्धालु परिक्रमा मार्ग पर उफनते सीवर से गुजरते हैं। वह मन ही मन व्यवस्था को कोसते हैं। चमचमाते शहर में टाट का यह पैबंद सात समंदर पार से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी किसी कष्ट से कम नहीं है। जरूरत इन बुनियादी बातों पर ध्यान देने की है। इसके बाद ही विकास की सच्ची तस्वीर सामने होगी।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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