हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में असम के सिलचर से पहली बार 541 वर्ष प्राचीन ठाकुर गौरांग महाप्रभु के श्रीविग्रह 20 सेवकों के दल के साथ वृंदावन धाम पहुंचे। लगभग 541 वर्ष पूर्व तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान वर्तमान बांग्लादेश में भगवान जगन्नाथ की प्रेरणा से चैतन्य महाप्रभु के दादा उपेंद्र नाथ मिश्र द्वारा गौरांग महाप्रभु की दो मूर्ति प्रकट की गईं थी। ठाकुर गौरांग महाप्रभु के श्रीविग्रह की सबसे बड़ी विशेषता उनके नेत्र हैं जो भगवान जगन्नाथ के स्वरूप से मिलते हैं। सिलचर में इस विग्रह की नियमित सेवा-पूजा राधापद मिश्र द्वारा की जाती है। असम से वायुयान से 20 सेवकों के साथ वृंदावन पहुंचे ठाकुर गौरांग महाप्रभु का मंदिर के सेवायतों द्वारा स्वागत किया गया। महाप्रभु का यह वृंदावन प्रवास 2 नवंबर तक रहेगा। इस दौरान वह ब्रज के गौड़ीय संप्रदाय के मंदिरों और मठाें में भ्रमण करेंगे। मंदिर के सेवायत दामोदर चंद्र गोस्वामी ने बताया कि आचार्य कनिका प्रसाद गोस्वामी के सानिध्य में कार्तिक मास के अंतर्गत विशेष धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन किए जा रहे हैं। इस अवसर पर सुरेश शर्मा, गोपाल शरण शर्मा, महेश शर्मा, ओमप्रकाश, राधापति दास और अर्चना देवी दासी उपस्थित रहे।
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असम से पहली बार वृंदावन आए ठाकुर गौरांग महाप्रभु के श्रीविग्रह
