हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। हरियाणा, पंजाब और दिल्ली समेत पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर मथुरा की यमुना नदी पर साफ दिखने लगा है। ताजेवाला से आ रहे पानी को गोकुल बैराजों से लगातार छोड़े जाने के बावजूद यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। अभी जलस्तर 163.86 से बढ़कर 164.33 मीटर तक पहुंच गया है, जो चेतावनी बिंदु से महज 0.87 मीटर नीचे है। यदि मानसून की यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में बाढ़ के हालत बन सकते हैं।नलगातार बढ़ते जलस्तर से यमुना किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है और किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। हालांकि प्रशासन अलर्ट मोड पर है और जिलेभर में 34 बाढ़ चौकियां बनाईं गई हैं। वहीं प्रभावितों के लिए 19 स्थानों पर राहत शिविर के लिए भी जगह चिह्नित कर ली गई हैं। बीत दिनों ताजेवाला बांध, ओखला बैराज से करीब 20 हजार क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया। ऊपर से पानी छोड़ने के बाद गोकुल बैराज से भी 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यमुना के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित क्षेत्रों में मथुरा-वृंदावन, छाता, नौहझील, महावन, बलदेव और सुरीर समेत अन्य क्षेत्र आते हैं। इन क्षेत्रों के दर्जनों गांव व काॅलोनियां यमुना के किनारे स्थित हैं, जहां बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इधर, आपदा से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। अगर बाढ़ आती है तो उससे निपटने के लिए जिलेभर में 34 बाढ़ चौकियां बनाईं गई हैं। खतरे के निशान पर यमुना का जलस्तर पहुंचते ही प्रभावित गांव से लोगों को इन्हीं स्थानों पर ले जाया जाएगा। वहीं अधिकारियों का कहना है कि मानसून से पूर्व ही सभी इंतजाम कर लिए गए हैं। बचाव-राहत दल की तैनाती की जा रही है। बाढ़ से बचाव के संसाधन आदि भी जुटा लिए गए हैं। यमुना का जलस्तर बढ़ा है मगर, बाढ़ जैसी फिलहाल कोई स्थिति नहीं है।
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Author: Vijay Singhal
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