हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। राधाकुंड में गुरु पूर्णिमा पर्व को लेकर कस्बे के मंदिर, मठ, आश्रमों में तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। गुरु पूर्णिमा पर तुलसी की कंठी माला का विशेष महत्व होता है। इस दिन गुरु अपने शिष्य को गुरु दीक्षा के साथ तुलसी की कंठी माला देते हैं।
सनातन धर्म में भक्त को तुलसी के बने दानों की कंठी पहनना अनिवार्य है। इसके चलते तुलसी की कंठीमाला की भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मांग है। कस्बे की राधानगर कॉलोनी, राधारानी परिक्रमा मार्ग में तुलसी की कंठी माला तैयार की जा रही हैं। थोक व्यापारी प्रहलाद दास ने बताया कि यहां बनने वाली तुलसी की कंठी माला भारत के विभिन्न शहरों के साथ विदेश में जाती हैं। गांव में कंठी का कच्चा माल तैयार कर उनकी फिनिशिंग कराई जाती है। कंठी माला 5 रुपये से लेकर 10000 तक बाजार में उपलब्ध है। रामानुज, वैष्णव, निमार्क, चैतन्य, गौड़ीय संप्रदाय आदि के मानने वाले लोग तुलसी की माला धारण करते हैं।
सनातन धर्म में भक्त को तुलसी के बने दानों की कंठी पहनना अनिवार्य है। इसके चलते तुलसी की कंठीमाला की भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मांग है। कस्बे की राधानगर कॉलोनी, राधारानी परिक्रमा मार्ग में तुलसी की कंठी माला तैयार की जा रही हैं। थोक व्यापारी प्रहलाद दास ने बताया कि यहां बनने वाली तुलसी की कंठी माला भारत के विभिन्न शहरों के साथ विदेश में जाती हैं। गांव में कंठी का कच्चा माल तैयार कर उनकी फिनिशिंग कराई जाती है। कंठी माला 5 रुपये से लेकर 10000 तक बाजार में उपलब्ध है। रामानुज, वैष्णव, निमार्क, चैतन्य, गौड़ीय संप्रदाय आदि के मानने वाले लोग तुलसी की माला धारण करते हैं।
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Author: Vijay Singhal
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