हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने कहा कि ठाकुर श्रीराधावल्लभ लाल को ग्रीष्मकाल में शीतलता प्रदान करने के लिए सखियों द्वारा पुष्प-कली शृंगार की अनूठी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें नख-शिख शृंगार के लिए केवल पुष्प की कलियों का ही प्रयोग किया जाता है। यह द्वापरकाल से मंदिरों के सेवायत गोस्वामियों द्वारा अनवरत रूप से निभाई जा रही है। यह विचार उन्होंने वृंदावन शोध संस्थान में मंगलवार को श्रीराधावल्लभ सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित पुष्प-कली शृंगार मूर्त और अमूर्त संदर्भों में विषय पर संगोष्ठी में व्यक्त किए। इस दौरान पुष्प कली शीर्षक शृंगार ग्रंथ का विमोचन किया गया। डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि यह दुर्लभ सेवा भाव केवल वृंदावन के देवालयों की विशेषता है। ग्रंथ के संपादक आचार्य श्रीहित सुकृतलाल गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी के जामे, पाजामे, कमरपेटी और पाजेब जैसे आभूषण पुष्प-कलियों से निर्मित होते हैं। इन्हें उत्थापन से शयन काल तक धारण कराया जाता है। संस्थान के अध्यक्ष आरडी पालीवाल ने धन्यवाद दिया। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीराधावल्लभलाल के चित्रपट पर माल्यार्पण और पुलकित गोस्वामी द्वारा गाए गए मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर बलरामदास बाबा, स्वामी महेशानंद सरस्वती, एडीएम वित्त पंकज वर्मा, आचार्य राधेशलाल गोस्वामी, सचिव प्रवीण गुप्ता, सुशीला गुप्ता, इंदु राव, नामदेव शर्मा, अभय गोस्वामी, सक्षम गोस्वामी आदि उपस्थित रहे। संचालन डाॅक्टर राजेश शर्मा ने किया।
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Author: Vijay Singhal
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