हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। जिले के 10 ब्लॉकों के 20 प्रतिशत मलिन बस्तियों की 6 लाख आबादी के बीच से टीबी के मरीजों की खोज सोमवार से शुरू हो गई। एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) कार्यक्रम पांच मार्च तक चलेगा। क्षय उन्मूलन अभियान के प्रथम चरण में मलिन बस्तियों, कारागार, वृद्धाश्रम व अनाथालयों में सर्वे होगा। अभियान के माध्यम से जिले में क्षय रोग से संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की जाएगी। उन्हें क्षय रोग के उपचार प्रणाली के साथ जोड़कर निशुल्क जांच व उपचार भी दिया जाएगा। जिले की लगभग तीस लाख की आबादी है। इसमें बीस प्रतिशत यानी लगभग छह लाख लोगों में टीबी के लक्षण के आधार पर जांच कराई जाएगी। लक्षण होने पर सर्वे टीम उसी समय व्यक्ति के बलगम का नमूना लेकर जांच के लिए भेजेंगी। रोग की पुष्टि होने पर दो दिन के भीतर व्यक्ति का उपचार शुरू हो जाएगा। यह पूरा अभियान पोलियो अभियान की तरह चलाया जाएगा।
– डॉ. संजीव यादव, जिला क्षय रोग अधिकारी।
जीवाणु के कारण होता है यह रोग
टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है। यह तब फैलता है जब फेफड़ों में सक्रिय टीबी वाला व्यक्ति खांसता या छींकता है और कोई अन्य व्यक्ति निष्कासित बूंदों को अंदर लेता है, जिसमें टीबी के बैक्टीरिया होते हैं। यह रोग मुख्यत: फेफड़े में होता है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों जैसे दिमाग, हड्डी, ग्रन्थियों व आंत में भी हो सकता है। यह रोग टीबी के रोगी द्वारा खांसने या छींकने, रोगी द्वारा इधर उधर खुली जगह पर बलगम थूकने पर व रोगी के कपड़े, तौलिए, चादर आदि का प्रयोग करने से हो भी सकता है।
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Author: Vijay Singhal
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