हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के श्रौतमुनि निवास आश्रम में योगिराज रामानंद महाराज की जयंती के अवसर विद्वत संगोष्ठी का आयोजन हुआ। शुभारंभ कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज ने दीप जलाकर किया। कार्ष्णि गुरु ने कहा कि ने कहा कि संतों का सत्संग दुर्लभ होता है। वे हमें भक्ति से जोड़ते हैं। संत भगवान से भी श्रेष्ठ होते हैं, क्योंकि वे जिसका हाथ पकड़ लेते हैं उसे कभी नहीं छोड़ते। महामंडलेश्वर स्वामी आनंद भास्कर महाराज ने कहा कि संसार में जीवन निर्वाह की कला तो सिखाई जाती है, लेकिन गुरु के सान्निध्य में जीवन का निर्माण होता है। अखंडानंद आश्रम के महामंडलेश्वर श्रवणानंद और प्रवणानंद ने कहा कि गुरु और प्रभु के सान्निध्य में मन की कुटिलता समाप्त होती है। अनिरुद्धाचार्य, श्यामसुंदर पाराशर, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतदेव गिरी, स्वामी गोविंदानंद तीर्थ, महामंडलेश्वर अवशेषानंद गिरी, स्वामी सुतीक्ष्णदास महाराज, स्वामी अद्वैतमुनि, स्वामी निर्मलदास, स्वामी राममुनि, स्वामी परमानंद सरस्वती ने विचार रखे।
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Author: Vijay Singhal
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