हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। कोसीकलां के फालैन गांव में होलिका दहन की रात एक बार फिर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां 5200 साल पुरानी परंपरा के तहत संजू पंडा नाम के युवक ने जलती हुई होलिका से दौड़कर पार किया। 30 फीट ऊंची लपटों के बीच से गुजरते हुए उनका शरीर पूरी तरह सुरक्षित रहा। इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए करीब 80 हजार से अधिक श्रद्धालु वहां मौजूद थे। मौजूद श्रद्धालुओं ने बांके बिहारी की जय के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। फालैन गांव में होलिका दहन से पहले संजू पंडा ने कठिन व्रत और तपस्या का पालन किया। वसंत पंचमी से ही वे प्रह्लाद मंदिर में रहकर 45 दिन तक विशेष अनुष्ठान और व्रत करते रहे। उन्होंने दिन में केवल एक बार फलाहार लिया और नियमों का पालन किया। सुबह 4 बजे उन्होंने प्रह्लाद कुंड में स्नान किया, जिसके बाद उनकी बहन ने जलती हुई होलिका की परिक्रमा कर कलश से जल का अर्घ्य दिया। होलिका की अग्नि प्रज्वलित होते ही संजू पंडा ने दीपक की लौ को देखा। जैसे ही लौ ठंडी हुई, उन्होंने इशारा किया और दौड़ते हुए जलती हुई होलिका में प्रवेश किया। उन्होंने बीच में अग्नि देवता को प्रणाम किया और कुछ सेकंड में ही बिना झुलसे सुरक्षित बाहर आ गए। इस परंपरा को अब तक संजू के बड़े भाई मोनू पंडा निभाते आए थे, जो पांच बार जलती हुई होलिका से गुजर चुके हैं। इस बार पहली बार संजू ने यह साहसिक कार्य किया। संजू का कहना है कि जब वे अग्नि से गुजर रहे थे, तब उन्हें लगा कि स्वयं भक्त प्रह्लाद उनके साथ चल रहे हैं।
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Author: Vijay Singhal
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