हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर स्थित जगन्नाथ घाट पर बने प्राचीन जगन्नाथ मंदिर में इन दिनों रथ यात्रा की तैयारी चल रही है। यहां भक्त भगवान को रथ में विराजमान करने के लिए आतुर हैं। भगवान जगन्नाथ,बलराम जी और सुभद्रा जी के रथों को तैयार किया जा रहा है। तीनों अलग अलग रथों में विराजमान होंगे। मंदिर के कर्मचारी रथों की साफ सफाई कर रहे हैं। भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा को लेकर जगन्नाथ मंदिर में तैयारियां की जा रही है। मंदिर को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है। कारीगर रंग बिरंगे कपड़ों से मंदिर को सजा रहे हैं। गेट,आंगन और मंदिर परिसर की साफ सफाई की जा रही है। मंदिर को रंग बिरंगे कपड़ों के अलावा देसी विदेशी फूलों से भी सजाया जाएगा। प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीय को भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकलती है। उड़ीसा के पुरी शहर में इस दिन भव्य आयोजन किया जाता है। विशालकाय तीन रथों पर विराजमान भगवान जगन्नाथ,भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा नगर में निकलते हैं। जगन्नाथ जी की रथ यात्रा ब्रज भूमि में भी बड़ी धूमधाम और आस्था के साथ निकाली जाती है। यहां के वृंदावन में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से तीन रथ निकलते हैं। जो नगर भ्रमण करते हुए ज्ञान गुदड़ी पहुंचती है। भगवान जगन्नाथ जी की भव्य रथ यात्रा भगवान श्री कृष्ण की जन्म स्थली मथुरा में स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर से भी निकलेगी। यहां से शाम को भगवान जगन्नाथ जी सहित तीनों प्रतिमा को रथों पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद रथ डीग गेट,मंडी रामदास,चौक बाजार,स्वामी घाट, द्वारिकाधीश मंदिर,विश्राम घाट,होली गेट,भरतपुर गेट होते हुए वापस श्री कृष्ण जन्मस्थान पहुंचेगी। भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा से 15 दिन पहले स्नान यात्रा का आयोजन किया गया। भगवान जगन्नाथ जी का 108 कलश में लाए गए विभिन्न नदियों के जल,जड़ी बूटी मिश्रित जल आदि से स्नान कराया जाता है। अत्यधिक स्नान के कारण भगवान जगन्नाथ को ज्वर(बुखार) आ जाता है। जिसके कारण 15 दिन वह एकांत में रह कर जड़ी बूटियों से इलाज कराते हैं। यह परंपरा आज भी जगन्नाथ मंदिरों में निभाई जाती है। 15 दिन भगवान के भक्त दर्शन नहीं करते।
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Author: Vijay Singhal
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