मथुरा में पोक्सो कोर्ट ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए मात्र एक माह के अंदर अभियुक्त को दोषी मानते हुए 40 दिन के अंदर सजा सुनाई है। जनपद के चर्चित आठ वर्षीय नाबालिग पीड़िता से बलात्कार के मामले में शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट विपिन कुमार की अदालत ने दोष सिद्ध कर आजीवन कारावास की सजा व 35 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस केस की सरकार की ओर से पैरवी कर रहीं स्पेशल डीजीसी पोक्सो कोर्ट श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट ने बताया कि थाना जमुनापार में पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि 3 जनवरी 2023 को उसकी आठ वर्षीय नाबालिग बेटी घर पर अकेली थी, तभी सायं 5.30 बजे उसका पड़ौसी सतीश पुत्र मान सिंह आया और उसकी बेटी के साथ उसने बलात्कार की घटना को अंजाम दिया। जब वह शाम को घर वापस आया तो उसकी बेटी ने पूरी घटना की जानकारी उसे दी। जिस पर पुलिस ने धारा 376ए, बी, 452 भ.द.स. व 5एम/6पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था, जिसकी अपराध संख्या 03/23 है। स्पेशल डीजीसी अलका उपमन्यु एडवोकेट ने बताया कि इस घटना की चार्जशीद न्यायालय में 11 जनवरी 2023 को आई थी। अभियुक्त पर न्यायालय में 13 जनवरी 2023 को चार्ज लगाया गया था। इसकी सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट विपिन कुमार की अदालत में हुई। कोर्ट ने मुकदमें में गवाही और सबूतों के आधार पर अभियुक्त को दोषी माना। दोष सिद्ध होने के बाद शुक्रवार को अभियुक्त सतीश को धारा 452 भारतीय दंड संहिता के अपराध हेतु पांच वर्ष के कठोर कारावास तथा दस हजार रूपये के अर्थदण्ड, पोक्सो अधिनियम 2012 की धारा-5 एम/ 6 में आजीवन कारावास तथा पच्चीस हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। उपमन्यु ने बताया कि अर्थदण्ड अदा ना करने पर अभियुक्त छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतेगा। अभियुक्त द्वारा जेल में बितायी गई अवधि इस सजा में समायोजित की जाएगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियुक्त न्यायिक अभिरक्षा में है। स्पेशल डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट ने बताया कि इस घटना की चार्ज सीट न्यायालय में 11 जनवरी 2023 को आई थी तथा 13 जनवरी को चार्ज लगा था। इस दौरान अभियुक्त सतीश ने कई वकीलों को बदला, जिसके कारण न्यायालय ने उन वकीलों को भी समय दिया और इलाहाबाद बार काउंसिल के आह्वान पर मथुरा बार ने हड़ताल भी रखी तथा इस महीने कई बार कंडोलेंस भी हुई एवं अनेक छुट्टियां भी पड़ी। अगर वर्किंग डे को जोड़ा जाए तो यह 20 दिन से पहले आरोप सिद्ध हुआ है। आठ वर्षीय नाबालिग बालिका से बलात्कार के मामले की शासन व प्रशासन स्तर से भी प्रतिदिन मॉनिटरिंग होती रही। जिलाधिकारी पुलकित खरे व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पांडेय व अभियोजन के सभी अधिकारी इस जघन्य घटना पर अपनी निगाह बनाए हुए थे और प्रतिदिन केस के बारे में जानकारी लेते थे।
