• Mon. Feb 23rd, 2026

चिट्ठियां ही नहीं, निर्यातक का साधन बन रहीं डाक सेवाएं

ByVijay Singhal

Aug 21, 2025
Spread the love
हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। डाकघर से अब सिर्फ चिट्ठियां ही नहीं भेजी जातीं, बल्कि कान्हा की नगरी में बनी तुलसी माला और पोशाक भी विदेशों में कोरियर की जा रही हैं। यहां के उत्पादों की विदेशों में भी धाक जम रही है। कई देशों में यहां के उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग के बाद डाकघर ने तुलसी माला और पोशाक को कोरियर से भेजने की सेवा शुरू की है। इस साल 350 निर्यातक कम शुल्क में डाकघर की सेवा का लाभ ले चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्राइवेट शिपिंग कंपनियों के मुकाबले डाकघर कम शुल्क पर यहां के उत्पादों को विदेशों में भेजने की सुविधा दे रहे हैं। इसमें यूक्रेन, यूएसए, यूएई, ब्रिट्रेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, रूस समेत कई देश शामिल हैं। बीते साल शुरू हुई इस योजना के तहत डाकघर इन देशों में कान्हा की नगरी से पार्सल भेज रहे हैं। अलग-अलग देशों के हिसाब और भार के हिसाब से शुल्क लिया जाता है। वर्तमान में दो से पांच किलोग्राम तक के ही पार्सल भेजे जा रहे हैं। डाक विभाग अब भार की सीमा बढ़ाने की योजना बना रहा है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डाक निर्यात केंद्र शहर के निर्यातकों को ई-कॉमर्स की सुविधा भी प्रदान कर रहा है। इस योजना से डाक विभाग ने यहां की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता आसान कर दिया है। कारोबारी अपना रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज कराने के बाद डाक विभाग द्वारा मांगी गई जानकारियां देकर आसानी से अपना उत्पाद विदेश भेज सकते हैं। यहां से पार्सल दिल्ली स्थित फॉरेन पोस्ट ऑफिस जाता है, फिर संबंधित देश के लिए समुद्री जहाज द्वारा ऑर्डर सप्लाई किया जाता है। डाक विभाग ने दो निर्यात केंद्रों से 2024 में तीन करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। कई देशों में कान्हा की पूजा होती है, इसलिए वहां तुलसी की माला और पोशाक की ज्यादा मांग रहती है। यही कारण रहा कि विभाग द्वारा की गई इस पहल को अब सफलता मिलती नजर आ रही है। विजेंद्र, प्रवर डाक अधीक्षक ने कहा, वृंदावन और प्रधान डाकघर के निर्यात केंद्र से डाक बुक होकर विदेशों में जा रही हैं। इससे यहां के उत्पादों की धाक विदेशों में भी जम गई है। इस साल 350 से अधिक पार्सल कई देशों में भेजे गए हैं। ज्यादातर पार्सलों में तुलसी माला और कान्हा की पोशाकें हैं।
7455095736
Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published.