हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में दक्षिण भारतीय परंपरा के रंगजी मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव के दौरान ठाकुर गोदारंगमन्नार को यमुना स्नान के बजाय मंदिर की पुष्करणी में स्नान करवाया गया। यह निर्णय यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण के कारण लिया गया है। ठाकुरजी स्वर्ण पालकी में विराजमान होकर यमुना किनारे पहुंचे थे। यहां रंगनाथ और माता गोदाम्मा के बीच गेंद बच्छी की लीला हुई। ठाकुरजी को यमुना स्नान करवाने का समय आया तो यमुना के प्रदूषित जल को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने यह कार्यक्रम पुष्करणी में करने का फैसला किया। पहले वह यमुना में ही स्नान करते थे। शोभायात्रा मंदिर लौटकर आई और पुष्करणी को ही यमुना का स्वरुप मानकर उसमें स्नान कराया गया। भगवान रंगनाथ स्वर्ण निर्मित घोड़े पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। बहुमूल्य स्वर्णाभूषणों और रेशमी जरी की पोशाक में सजे ठाकुर जी के हाथ में रजत भाला उनकी दिव्य छवि को और आकर्षक बना रहा था। इससे पूर्व मंदिर में सुगंधित जल से ठाकुर जी का तिरुमंजन किया गया। सवारी जब विश्रामस्थल बड़ा बगीचा पहुंची तो वहां भव्य आतिशबाजी से ठाकुर जी का स्वागत किया गया। रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा और भक्तों ने आतिशबाजी का जमकर आनंद लिया।
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Author: Vijay Singhal
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