हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। राधाकुंड में ब्रज की संस्कृति की अद्भुत कला से जुड़ा हुआ नृत्य है गांव मुखराई का चरकुला नृत्य। इसमें 108 दीपकों को सिर पर रखकर जैसे ही हुरियारिनों ने ढप, ढोल, मृदंग व बंब की धुन पर नृत्य शुरू किया राधारानी की नानी मुखरा देवी का गांव जयकारों से गुंजायमान हो उठा। राधाकुंड के गांव मुखराई में द्वापर युगीन चरकुला नृत्य की अनूठी परंपरा का निर्वहन कलाकारों द्वारा किया गया। लोकगीतों के बीच हुरियारिनों ने हुरियारों पर प्रेम की की लाठियां बरसाईं। महिलाओं ने 108 जलते दीपकों को सिर पर रख नृत्य किया तो इसे देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। हुरियारों ने लोकगीत गाकर चरकुला नृत्य कर रही महिलाओं को उत्साहित किया। जुग-जुग जियो तुम नाचन हारि…लोकगीत पर महिला और पुरुषों ने जमकर नृत्य किया। चरकुला नृत्य में जय देवी ने सर्वप्रथम ठाकुर मदन मोहनजी के द्वार से चरकुला नृत्य प्रारंभ किया। उनके साथ जानकी, विजय देवी, उर्मिला देवी, नीतू आदि ने बारी-बारी से चरकुला नृत्य का प्रदर्शन किया। ब्रज लोक कला फाउंडेशन के दानी शर्मा ने बताया चरकुला नृत्य की शुरुआत गांव मुखराई से शुरू हुई थी। रवि दुबे के अनुसार गांव मुखराई में श्रीराधारानी की नानी मुखरा देवी ने राधारानी के जन्म की खुशी में रथ के पहिए को सिर पर रख नृत्य किया था। प्रत्येक वर्ष होली की दौज पर यह उत्सव मुखराई में मनाया जाता है। समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष किशन सिंह चौधरी, विधायक ठाकुर मेघश्याम सिंह का स्वागत राम किशोर शर्मा व राहुल दुबे द्वारा किया।
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Author: Vijay Singhal
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