हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। होली पर मांट में भी इसी से मिलता जुलता प्रचलन है। यहां धुलेंडी के दिन कस्बे के बुजुर्ग होली के रसिया गाते हुए गुलाल लगाने उन परिवारों में जरूर जाते हैं, जिनमें पिछले एक वर्ष में कोई गमी हुई हो। उन परिवारों के साथ कुछ समय बिताया जाता है, उन्हें रंग व गुलाल लगाने की भी परम्परा है। इस दौरान मौके पर ज्ञान सिंह, ओपी चौधरी, देशराज सिंह, हरपाल सिंह, मानसिंह, धर्मेंद्र सिंह, नीरज सिंह समेत क्षेत्र के अन्य लोग भी मौजूद रहे। परंपरा की बात करें तो मांट क्षेत्र के गांव जाबरा में जिन परिवारों में मौत हो चुकी होती है, उनके दरवाजे पर नगाड़े की थाप पर होली के रसिया गायन कर शोक उठाया जाता है। गांव जाबरा में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। शिवरात्रि से होली तक यह कार्यक्रम चलता है। गांव में किसी भी कारण से कोई मौत हुई हो, मृतक के परिवार के यहां नगाड़ा (बम्ब) जाता है। गांव के वयोवृद्धों द्वारा होली के रसिया गायन कर परम्परा को निभाया जाता है। बम्ब बजाकर ग्रामीणों को संदेश दिया जाता है कि जो भगवान को मंजूर था, वो तो हो गया। अब सभी लोग मिल कर प्रेम से होली के त्योहार को मनाओ। इसे गांव की भाषा में त्योहार उठाना कहा जाता है। गांव के प्रह्लाद सिंह ने बताया कि सभी गांव के वृद्ध रात्रि में होली के रसिया गायन करते है और घर-घर जाकर नगाड़ा बजाया जाता है।परंपरा की बात करें तो मांट क्षेत्र के गांव जाबरा में जिन परिवारों में मौत हो चुकी होती है, उनके दरवाजे पर नगाड़े की थाप पर होली के रसिया गायन कर शोक उठाया जाता है। गांव जाबरा में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। शिवरात्रि से होली तक यह कार्यक्रम चलता है।गांव में किसी भी कारण से कोई मौत हुई हो, मृतक के परिवार के यहां नगाड़ा (बम्ब) जाता है। गांव के वयोवृद्धों द्वारा होली के रसिया गायन कर परम्परा को निभाया जाता है। बम्ब बजाकर ग्रामीणों को संदेश दिया जाता है कि जो भगवान को मंजूर था, वो तो हो गया। अब सभी लोग मिल कर प्रेम से होली के त्योहार को मनाओ। इसे गांव की भाषा में त्योहार उठाना कहा जाता है। गांव के प्रह्लाद सिंह ने बताया कि सभी गांव के वृद्ध रात्रि में होली के रसिया गायन करते है और घर-घर जाकर नगाड़ा बजाया जाता है।
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Author: Vijay Singhal
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