हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। नौहझील क्षेत्र के गांव देदना की यशोदा देवी अपने पति प्रहलाद बघेल की जिंदगी बचाने के लिए पिछले एक साल से मौत से जंग लड़ रही हैं। प्रहलाद टीबी (क्षय रोग) से पीड़ित हैं और अब उनकी सांसें ऑक्सीजन सिलेंडरों के सहारे चल रही है। यशोदा ने अपने पति का इलाज कराने के लिए डेढ़ बीघा जमीन तक बेच दी, लेकिन हालात इतने बिगड़ गए हैं कि जमीन बिकने के बाद अब बच्चों का पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। आंसुओं में डूबी यशोदा कहती हैं कि उन्होंने सब कुछ बेच दिया, अब उनके पास फूटी कोड़ी तक नहीं है। सोशल मीडिया के जरिये उन्होंने सीएम से गुहार लगाते हुए कहा कि योगी जी, मेरे पति को बचा लीजिए। मेरे चार छोटे-छोटे बच्चे अनाथ होने की कगार पर हैं। टीबी के मरीजों को मुफ्त जांच, इलाज, दवा और निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक मदद देने का वादा सरकार ने किया था, लेकिन देदना गांव का प्रहलाद आज तक किसी भी सरकारी सहायता से वंचित है। प्रहलाद को रोजाना 3-4 ऑक्सीजन सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है। यशोदा खुद सिलेंडर मंगाती हैं, खुद उठाती हैं और लगाती भी हैं, लेकिन अब उनकी हिम्मत जवाब दे रही है। रोते बिलखते हुए यशोदा ने कहा कि अब उनके हाथ कांपने लगे हैं, आंखें धुंधला गई हैं। अगर वह हार गईं, तो पति की सांसें भी रुक जाएंगी। उनका कहना है कि अगर कोई मदद नहीं मिली तो उनके पति की जिंदगी की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो जाएगी। सीएचसी प्रभारी डाक्टर हेमराज सिंह ने बताया कि प्रहलाद का इलाज सीएचसी पर हुआ है। उनके घर पर टीम भेजकर इलाज कराया गया है। उच्च स्तरीय इलाज के लिए दो बार जिला अस्पताल मथुरा व एक बार एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा भी रेफर किया गया। सीएचसी से हर संभव उपचार दिया गया है।
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Author: Vijay Singhal
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