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बांके बिहारी मंदिर के पैसे को न छुए सरकार, इलाहाबाद HC ने मंदिर प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप से किया मना

ByVijay Singhal

Sep 27, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्री बांके बिहारी मंदिर मथुरा कॉरिडोर मामले में मंगलवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सेवायतों की ओर से एक बार फिर कहा गया गया कि मंदिर प्रबंधन कॉरिडोर के लिए न तो धन देगा और न ही मंदिर के कामकाज में सरकार के किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को स्वीकार किया जाएगा। कहा- यदि सरकार कुछ बेहतर करना चाहती है तो वह अपने स्तर से करे। मंदिर के चढ़ावे का इस्तेमाल न करें। कहा कि श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायतों को मंदिर प्रबंधन में सरकार का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने किया। डबल बेंच ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह मंदिर के पैसे को छोड़कर अन्य कोई तरीका बताएं कि किस प्रकार कॉरिडोर का निर्माण संभव हो सकेगा। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि कॉरिडोर बनाने में कितना खर्च आएगा और इसका इंतजाम सरकार किस प्रकार से करेगी। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने में कितना धन खर्च हुआ था। राज्य सरकार का पक्ष रख रहे अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल का कहना था कि यदि एक ट्रस्ट बना दिया जाए तो उसमें सरकार भी अंशदान दे सकती है, लेकिन मंदिर सेवायतों को ट्रस्ट का प्रस्ताव मंजूर नहीं था। अपर महाधिवक्ता का कहना था कि जमीन के अधिग्रहण में लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे और अन्य धनराशि भी लगेगी, जिसका इंतजाम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और सरकारी सहयोग द्वारा मिलकर किया जा सकता है। इस पर कोर्ट का कहना था कि सरकार अपनी ओर से क्या करेगी, इस बारे में जानकारी दे। इस पर अपर महाधिवक्ता ने कहा कि बेहतर हलफनामा दाखिल करने के लिए उन्हें और समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 5 अक्टूबर नियत की है। मथुरा श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से होने वाली असुविधा व अप्रिय घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने मंदिर कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव दिया है। सरकार चाहती है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की रकम से कॉरिडोर का निर्माण किया जाए लेकिन मंदिर के सेवायतों का कहना है कि मंदिर उनकी प्राइवेट संपत्ति है। इसमें सरकार का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को इस मसले का समाधान बताने के लिए कहा है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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