हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद गोकुल, वृंदावन और नंदगांव के पांच प्राचीन कुंडों का कायाकल्प करेगा। विभाग ने उनके मूल स्वरूप को प्रदान करने की तैयारी शुरू कर दी है। इनके सौंदर्यीकरण के साथ-साथ जैविक प्रक्रिया द्वारा गंदे पानी का शोधन होगा। इस परियोजना में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसकी शुरुआत गोकुल के अष्टसखी घाट कुंड से हो गई है। सीईओ श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि गोकुल में यमुना किनारे ठकुरानी घाट और मुरली घाट के बीच अष्टसखी घाट कुंड है, जो अब तक कीचड़ से भरे हैं। गोकुल के एक हिस्से का गंदा पानी भी इस स्थान पर एकत्रित होता है। कुंडों की दशा सुधारने के लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। यहां से सिल्ट निकाली जा रही है। कुंडों को प्राचीन स्वरूप देने के लिए पुणे की संस्था ग्रीन वाटर रिव्होल्यूशन प्रालि काम कर रही है। कुंडों में ग्रीन ब्रिज बनाए जाएंगे। इनमें बालू, पत्थर, वेक्टेरिया, खाद और पौधों का उपयोग होगा। इस प्रक्रिया के तहत कुंडों तक पहुंचने वाला गंदा पानी शोधित होगा। उन्होंने बताया कि गोकुल में अष्टसखी के अलावा वृंदावन सुनरख स्थित सौभरि कुंड, कोसी ड्रेन और नंदगांव स्थित ललिता कुंड और वृंदा कुंड की भी दशा सुधरेगी। अधिकारियों ने अष्टसखी घाट का हाल जाना उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ श्याम बहादुर सिंह ने गोकुल स्थित अष्टसखी कुंड का निरीक्षण किया। यहां कुंड से सिल्ट निकलने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कार्य की गुणवत्ता के साथ-साथ व्यवस्थाएं परखीं। इस दौरान पर्यावरण विशेषज्ञ मुकेश शर्मा, रामवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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