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स्वयंसेवकों में अनुशासन का निर्माण करता है घोष

ByVijay Singhal

Jun 10, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ब्रज प्रांत का 15 दिवसीय घोष वर्ग रामकली सरस्वती विद्या मंदिर, केशव धाम वृंदावन में 26 मई से चल रहा है। यह घोष प्रशिक्षण वर्ग 11 जून तक चलेगा। घोष वर्ग में आगरा, मथुरा, एटा, बरेली, हाथरस, अलीगढ़, मैनपुरी, बदायूं, शाहजहांपुर आदि 12 जिलों के लगभग 100 स्वयंसेवक शिक्षार्थी, शिक्षक एवं व्यवस्था के रूप में सहभागिता कर रहे हैं। ब्रजप्रांत के घोष प्रमुख ललित कुमार ने बताया कि संघ में घोष विभाग का अत्यंत महत्व है। शारीरिक कार्यक्रम, संचलन आदि के समय घोष का सामूहिक वादन स्वयंसेवकों में अनुशासन का भाव पैदा करता है। संघ के घोष में आनक, पड़व, शंख, त्रिभुज, तुर्य, नागांग, स्वरद, वेणु आदि प्रमुख वाद्य यंत्र हैं, जिनका प्रशिक्षण स्वयंसेवक इस घोष वर्ग में ले रहे हैं। महानगर कार्यवाह विजय बंटा सर्राफ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में घोष की क्रमिक विकास यात्रा पर बताते हुए कहा कि संघ स्थापना के पश्चात सन 1928 में विजयदशमी के अवसर पर संघ के संचलन में नागपुर की सड़कों पर प्रथम बार घोष का वादन किया, तब से लेकर अब तक निरंतर संघ में घोष विभाग प्रगति कर रहा है। आज संपूर्ण भारतवर्ष में 70,000 से भी अधिक घोष वादक संघ के स्वयंसेवक हैं। घोष वर्ग में वर्ग कार्यवाह राधेश्याम, वर्ग पालक कीर्ति कुमार, मुख्य शिक्षक बरेली शेखर, मैनपुरी शिवम, लखनऊ से धर्मेंद्र, दिल्ली से रविकांत, प्रीतम, आगरा से राहुल, यश, आदित्य, मथुरा से समर आदि शिक्षक घोष का शिक्षण दे रहे हैं।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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