हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। यमुना प्रदूषण नियंत्रण को लेकर पिछले दो वर्ष से अधर में लटके करोड़ों के कार्यों को गति मिलेगी। क्योंकि अब मथुरा के चार नालों को टैप करने के साथ ही एसटीपी बनाने के लिए गोकुल बैराज के पास सिंचाई विभाग ने जल निगम को जमीन दे दी है। इस जमीन को लेकर गत दिनों हुई लखनऊ में कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पास हो गया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में एडीएम वित्त योगानंद पांडेय की अध्यक्षता में यमुना कार्य योजना की बैठक हुई। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ यमुना को लेकर जनहित याचिकाकर्ता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी शामिल रहे। यमुना प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नगर के बाकी चार नालों की टैपिंग करने के साथ ही वृंदावन में कोसी ड्रेन को टैप कर एसपीएस और एसटीपी के निर्माण कार्य में गति लाने पर जोर दिया गया। गोकुल बैराज के पास एसटीपी के लिए जमीन जल निगम को दिए जाने का मामला पिछले दो साल से अधर में लटका था। इसी कारण लगभग 400 करोड़ के कार्य इसमें मथुरा का अंबाखार नाला, काला पत्थर नाला, औरंगाबाद अप स्ट्रीम और औरंगाबाद डाउन स्ट्रीम नाले की टैपिंग एवं इससे जुड़े कार्य नहीं हो रहे थे। एसटीपी के लिए सिंचाई विभाग से जल निगम को जमीन देने का कैबिनेट में पास हुए प्रस्ताव के बाद अब कार्य शुरू हो जाएगा। डेयरी फार्म अंबाखार के पास पुराने पंपिंग स्टेशन की क्षमता बढ़ाई जाएगी। उधर कोसीकलां, छाता और वृंदावन एसपीएस, एसटीपी बनाए जाएंगे, जिससे कोसी ड्रेन का दूषित पानी जो वर्षों से सीधे यमुना में जा रहा था, उसका शोधन हो सकेगा। इसे लेकर सुनरख के पास एसटीपी निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यमुना प्रदूषण के नोडल अधिकारी एडीएम वित्त ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को ऐसे 44 उद्योगों की जांच, पड़ताल के निर्देश दिए जोकि एनजीटी के आदेश पर शहर से बाहर किए गए थे। बैठक में जलनिगम के एक्सईएन आरपी सिंह, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पंकज यादव, सीओ सिटी प्रवीण मलिक, नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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