हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा में कानून की चौखट पर इंसाफ की मौत हो गई और अपराधियों की जीत। इंसाफ दिलाने का ढोल पीटने वाले सिस्टम से एक परिवार का भरोसा उठ गया। वोट मांगने के दौरान दावे ठोकने वाले नेताओं से। यह टीस है हाईवे थाना क्षेत्र की अमर कालोनी के 22 साल के राहुल और 19 साल की दीपा की। इनके माता-पिता की डकैती के दौरान बदमाशों ने हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के बाद इंसाफ के लिए लड़ते हुए मृत दंपती की बड़ी बेटी राखी भी सिस्टम से हार गई और उसने भी आत्महत्या कर ली। आठ अक्तूबर यानी आज राखी की मौत को छह साल हो गए। मगर, उसे न अपनी मौत का इंसाफ मिला और न माता-पिता की। पुलिस ने अपराधियों के आगे हथियार डालते हुए बहुचर्चित वारदात में दिसंबर 2022 में एफआर लगा दी। 8 मार्च 2017 को थाना हाईवे क्षेत्र के अमर कॉलोनी में ट्रांसपोर्टर बनवारी लाल (42 और उनकी पत्नी रविबाला (38) की घर में सोते वक्त अज्ञात बदमाशों ने निर्मम हत्या कर डकैती की घटना को अंजाम दिया था। उनकी आंखे निकाल ली गई थी। बनवारी लाल का घर उस वक्त निर्माणाधीन था, उसके लिए उन्होंने बाजना में पुश्तैनी जमीन को बेचकर 5 लाख रुपये जुटाए थे। उन सहित बदमाश दो सोने की जंजीर, दो अंगूठी, मंगलसूत्र, दो चांदी की कोदनी, एक जोड़ी पाजेब, दो चांदी के हाथों के ब्रासलेट, दो सोने की लोंग और कई चांदी के सिक्के ले गए थे। अपने माता-पिता की निर्मम हत्या-डकैती के अपराधियों को पकड़वाने के लिए दंपती की बड़ी बेटी राखी पुलिस-प्रशासन के चक्कर लगा रही थी। अधिकारी उसे टहला रहे थे। नेताओं ने भी सिर्फ दिलासा दिया। सिस्टम से हारकर राखी ने 8 अक्तूबर 2022 में जहर खाकर जान दे दी थी। प्रदेश में नई-नई योगी सरकार का गठन हुआ था। पूरा शासन-प्रशासन इस घटना से हिला गया। तत्कालीन एडीजी अजय आनंद ने 15 सदस्यीय एसटीएफ बनाकर 15 दिन में वारदात के खुलासे का दावा किया। मगर, नतीजा सिफर रहा। बनवारी और उनकी पत्नी रविबाला की हत्या, राखी की आत्महत्या के बाद परिवार में अब बस 22 साल का राहुल और 18 साल की उसकी बहन राखी है। राखी केआर कॉलेज से बीए कर रही है। राहुल भी बीए अंतिम वर्ष का छात्र है। राहुल और राखी ने बताया कि परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। घटना के बाद डीएम ने सरकारी नौकरी दिलाने का वादा किया था, वो आज तक पूरा नहीं हुआ। ताऊ के परिवार से उन्हें आर्थिक मदद मिलती है, जब जाकर घर का चूल्हा जलता है। कुछ समय पहले तक तो परिवार को जो सरकारी राशन मिलता था, उसका आधा हिस्सा बेचकर घर जलाते थे।
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Author: Vijay Singhal
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