हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। परिषदीय विद्यालयों में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षक विभाग के निशाने पर हैं। शुक्रवार को इसी तरह के नौ शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया। बीएसए द्वारा की गई कार्रवाई से फर्जी शिक्षकों से खलबली मच गई है। अभी और भी शिक्षकों की जांच चल रही है। परिषदीय विद्यालयों में हुई विभिन्न भर्तियों में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों से अभ्यर्थी नौकरी लेने में सफल हुए हैं। अब तक हुईं जांच में यह बात सामने आईं और इन पर कार्रवाई हो रही हैं। परिषदीय विद्यालयों में फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने वाले शिक्षकों की जांच के लिए एडीएम प्रशासन, पुलिस अधीक्षक अपराध, बीएसए की संयुक्त जांच समिति ने जांच की थी। स्नातक, टीईटी, दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी मिले थे। जांच में नौ शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज फर्जी मिलने पर कार्रवाई हुई है। बीएसए सुनील दत्त ने इन पर बर्खास्तगी की कार्रवाई है। इस कार्रवाई के बाद बीएसए कार्यालय एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। जांच होने पर अभी और शिक्षकों पर कार्रवाई हो सकती है। दिवाकर कौशिक, दिनेश कुमार सिंह, सुनील कुमार, मानवेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, विपिन कुमार, खजान सिंह, रनवीर सिंह, कुलदीप कुमार सारस्वत इन शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई है। बर्खास्त शिक्षकों का फर्जीवाड़ा सामने लाने में लेखाधिकारी कार्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गत वर्ष तत्कालीन बीएसए वीरेंद्र कुमार सिंह ने दिवाकर कौशिक व कुलदीप सारस्वत समेत करीब आठ शिक्षकों के वेतन आदेश जारी किए थे। मामला संदिग्ध देख एओ कार्यालय ने बीएसए से आदेश पर आपत्ति जताते हुए फिर से विचार करने के लिए पत्र लिखा था और इन शिक्षकों के वेतन लगाने से मना कर दिया था। एओ कार्यालय की आपत्ति के बाद ही एक शिक्षक कुलदीप कुमार हाईकोर्ट पहुंच गए थे। मामला प्रमुख सचिव समेत अन्य उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने पर वर्ष 2016 में नियुक्त 19 शिक्षकों पर वर्तमान बीएसए सुनील दत्त द्वारा सात साल बाद प्राथमिकी कराई गई। यदि लेखाधिकारी कार्यालय द्वारा सतर्कता नहीं बरतते तो फर्जी शिक्षक वेतन लगवाने में सफल हो जाते।
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Author: Vijay Singhal
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