हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में पिछले दिनों नगर निगम प्रशासन द्वारा बांकेबिहारी मंदिर मार्ग में लगवाई गई लोहे की बैरिकेटिंग स्थानीय लोगों और व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गई है। बैरिकेटिँग के विरोध में बांकेबिहारी मंदिर के व्यापारियों ने अपने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर रोष जताया, वही आए दिन की समस्या झेल रहे व्यापारियों और स्थानीय लोगों के सब्र का बांध मंगलवार को जबाव दे गया। लोगों ने मार्ग से बैरिकेटिंग उखाड़ फैंकी। व्यापारियों के विरोध के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया और बैरिकेटिंग हटवाना शुरू कर दिया।पिछले दिनों जिला प्रशासन के आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन के द्घारा विद्यापीठ चौराहे से बांकेबिहारी पुलिस चौकी के निकट तक समानांतर बैरिकेटिंग लगा दीं। इस बैरिकेटिंग से जहां स्थानीय लोगों को परेशान हो रही थी वहीं क्षेत्र का बाजार पूरी तरह ठप हो गया। स्कूलों की वैन ना आने से अभिभावक बच्चों को छोड़ने और लेने जाने के लिए मजबूर थे। मंगलवार को बैरिकेटिंक के विरोध में व्यापारियों ने बाजार बंद कर दिया। विद्यापीठ चौराहा से लेकर बांके बिहारी मंदिर तक का बाजार बंद कर विरोध जताया गया। व्यापारियों की मांग है कि इस बैरिकेटिंग के कारण व्यापार ठप हो गया है। मंगलवार को व्यापारियों ने दुकानों को बंद रखा और विरोध में उतर आए। व्यापारियों के विरोध का समर्थन करने पार्षद पद के वार्ड संख्या 70 के प्रत्याशी भी पहुंच गए। निवर्तमान पार्षद वैभव अग्रवाल ने बताया कि इस बैरिकेटिंग के कारण क्षेत्र के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। दीपक पराशर ने बताया कि प्रशासन कभी गेट लगा देता है,कभी बैरिकेटिंग तो कभी रैलिंग लगा देता है। इधर व्यापारी गोपाल खंडेलवाल , नीरज गौतम, भोला गौतम, प्रिंस, गोविंद खंडेलवाल, सोनू ने कहा कि इस बैरिकेटिंग से व्यापार चौपट हो गया है। इधर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के विरोध के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया। प्रशासन ने विरोध को देखते हुए बैरिकेटिंग को हटवाना शुरू कर दिया। रैलिंग हटवाने का काम शुरू होते ही व्यापारियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी और सभी ने ठाकु बांके बिहारी के जयकारे लगाए।600 घर और 250 दुकान हो रहीं प्रभावित वृंदावन। ठाकुर बाके बिहारी मंदिर मार्ग पर लगाई गई बैरिकेटिंग से लगभग 600 घरों में रहने वाले लोग और 250 से अधिक व्यापारी परेशान थे। व्यापारियों का व्यापार ठप हो गया है तो वहीं स्थानीय निवासियों का घरों से निकलना मुश्किल हो चला था। बच्चों को स्कूल की गाड़ी तक छोड़ने के लिए 1 किलोमीटर तक जाना पड़ा।
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Author: Vijay Singhal
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