हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। श्री कृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट की 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए अब योगेश्वर श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट ने ईदगाह को हटाने संबंधी दावा पेश किया है। यह दावा श्री कृष्ण लला विराजमान जन्मस्थान की ओर से कौशल किशोर ठाकुर उर्फ कौशल सिंह तोमर व ट्रस्ट के अध्यक्ष अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बुधवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में पेश किया, जिसे सुनवाई के लिए सिविल जज सीनियर डिवीजन द्वितीय की अदालत में भेजा गया है। पक्षकारगण ने 23 पेज की दावे में कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को पेश करते बताया है कि श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर, कटरा केशवदेव का मूल ढांचा एक अष्टभुजिय चबूतरे पर खड़ा था, जो कि मूल मंदिर का एक भाग था। इसका विवरण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम निदेशक मेजर जनरल अलेक्जेंडर कर्निंघम ने अपनी पुस्तक में दिया है। फ्रेंच यात्री जीन बैप्टिस्ट टैवर्नियर ने सन 1630-68 के बीच की 6 बार की भारत यात्रा के दौरान मंदिर की विशालकायता और मंदिर निर्माण में लगे पत्थर और उनमें मौजूद काले रंग के विग्रहों की भी जानकारी दी है। दावे में कहा गया है कि मंदिर की आकृति-बनावट तथा निर्माण में उपयोग की गई सामग्री ईदगाह की निर्माण सामग्री से मेल खाती है। इससे साबित होता है ईदगाह श्री कृष्ण जन्मस्थान का मूल ढांचा है। औरंगजेब ने मूर्तियों व अन्य कलाकृतियों को नष्ट कर मंदिर पर अवैध कब्जा कर मस्जिद का रूप दिया था। वर्ष 1920 में इस शाही ईदगाह की इमारत को संरक्षित किया गया। दावे में ओरछा के राजा वीर बुंदेला द्वारा निर्मित मंदिर की भी जानकारी भी दी गई है। इसके साथ ही भगवान श्री कृष्ण की जन्म से लेकर तिरोधान तक की पूरी जानकारी दी है। श्री कृष्ण लला विराजमान जन्मस्थान की ओर से कौशल किशोर ठाकुर उर्फ कौशल सिंह तोमर के अलावा योगेश्वर श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट, क्षत्रिय शक्ति पीठ विकास ट्रस्ट, अजय प्रताप सिंह एडवोकेट अध्यक्ष योगेश्वर श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट तथा आनजंय कुमार सिंह वादी हैं, जबकि प्रतिवादीगणों में सुन्नी सेेंट्रल वक्फ बोर्ड, मेनेजमेंट कमेटी शाही ईदगाह ट्रस्ट, श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान हैं। श्री कृष्ण जन्मस्थान मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष पांडेय ने बुधवार को जिला जज की अदालत में दिया गया रिवीजन प्रार्थना पत्र वापस ले लिया। उन्होंने बताया कि पहले ऐसा लग रहा था कि अदालत द्वारा अमीन रिपोर्ट पर वादकारी को सुना नहीं जाएगा, जिसके चलते उन्होंने रिवीजन प्रार्थना पत्र लगाया था परंतु अब उनका पक्ष सुन लिया गया है। इसलिए रिवीजन प्रार्थना पत्र वापस ले लिया है। शैलेन्द्र सिंह ने खारिज वाद में लगाया प्रार्थना पत्र लखनऊ हाईकोर्ट के अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह ने अपने खारिज वाद में बीमारी संबंधी प्रार्थना पत्र देकर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर पुन: सुनवाई की मांग की है। अदालत ने इसके लिए 12 मई की तारीख तय की है।
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Author: Vijay Singhal
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