हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बरसाना में ब्रज में लट्ठमार होली की परम्परा बेहद प्राचीन है और बरसाना को इसका केंद्र माना जाता है। बरसाने की लट्ठमार होली के विश्व प्रसिद्ध होने की वजह है इसका परंपरागत स्वरुप। बरसाने की हुरियारिनों से होली खेलने के लिए नंदगांव के हुरियारे आते हैं।जहां वह हुरियारिनों द्वारा किए जाने वाले लाठी के वार को अपने साथ लाई ढाल से बचाते हैं। इसी लट्ठमार होली को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ब्रज पहुंचते हैं। बरसाना की लट्ठमार होली से एक दिन पहले लड्डू होली खेली जाती है। लड्डू होली के पीछे मान्यता है कि द्वापर युग में राधा रानी और उनकी सखियों ने भगवान के साथ होली खेलने का मन बनाया। इसके लिए बाकायदा एक दूत न्योता देने भगवान श्री कृष्ण के गांव नंदगांव भेजा गया।नंदगांव में जब भगवान ने होली खेलने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। इसके बाद जब पंडा ने आकर बरसाना में भगवान के होली खेलने का निमंत्रण स्वीकार करने की बात कही, तो यह सुनकर बरसाना वासी खुश हो गए और एक-दूसरे पर लड्डू फेंकने लगे। यही से लड्डू होली की शुरुआती मानी जाती है।द्वापर युग में हुई इस परंपरा का निर्वहन आज भी उसी तरह किया जाता है, जैसे भगवान के समय में किया गया। होली का निमंत्रण देकर जब ये पांडा लौट कर बरसाने के प्रमुख श्री जी मंदिर में पहुंचता है, तो यहां मंदिर में सभी गोस्वामी एकजुट होकर उसका स्वागत करते हैं। बधाई स्वरुप पांडा पर लड्डू फेंकते हैं। इसके बाद मंदिर प्रांगण में मौजूद भक्त भी पांडा के ऊपर लड्डू फेंकते हैं, जिसे सभी लड्डू होली के नाम से जानते हैं। इस होली में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से भक्त बरसाना पहुंचते हैं और लड्डू होली का आनंद लेते हैं।बरसाना की लड्डू और लट्ठमार होली का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु बरसाना पहुंचे हैं। परंपरा के अनुसार, हर साल लड्डू होली वाले दिन मंदिर का पूरा प्रांगण राधा-कृष्ण के प्रेम में सराबोर हो जाता है। राधा-कृष्ण के भजनों का और होली के गीतों का मंदिर प्रांगण में स्वर सुनाई देते हैं।इस दिन लोग राधा कृष्ण के प्रेम में मग्न होकर नाचने लगते हैं और लड्डू का प्रसाद पाकर खुद को धन्य मानते हैं। यहां श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं। बरसाना की प्रसिद्ध लड्डू होली को लेकर ब्रजवासी ही नहीं श्रद्धालु भी हर साल बेहद उत्साहित नजर आते हैं। मंदिर के सेवायतों द्वारा निमंत्रण स्वीकार करने की सूचना मिलते ही राधा रानी के समक्ष बैठकर समाज गायन किया जाता है। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर लड्डू और रंग गुलाल से सराबोर हो जाता है। इस बार अनुमान है कि लड्डू होली पर 5 हजार किलो लड्डू से होली खेली जाएगी।
