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मथुरा में कैदी बना रहे रंग गुलाल,अरारोट में सब्जियों को मिलाकर तैयार कर रहे रंग, खुशबू के लिए डाल रहे इत्र

ByVijay Singhal

Feb 21, 2023
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ब्रज की होली की बात निराली है। ब्रज में होली रंगों से लेकर अंगारों तक खेली जाती है। एक अनुमान के मुताबिक, ब्रज में प्रति वर्ष हजारों कुंतल गुलाल उड़ाया जाता है। इस साल मथुरा जेल में बंद कैदी होली के लिए खास रंग गुलाल तैयार कर रहे हैं। हर्बल तरीके से तैयार किया जा रहा यह गुलाल सेहत के लिए बिल्कुल भी नुकसान दायक नहीं हैं। होली का पर्व वैसे तो देश दुनिया में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। रंगों के इस त्यौहार के नजदीक आते ही लोगों में अजीब सी मस्ती छा जाती है। ब्रज में होली 40 दिन तक खेली जाती है। यहां होली की शुरुआत बसंत पंचमी से होती है जो कि धूल होली के 7 दिन बाद तक चलती है। बसंत पंचमी से रंग गुलाल उड़ना शुरू होता है जिसका समापन रंगनाथ भगवान के होली खेलने के साथ है। ब्रज की होली को और खास बनाने के लिए जेल में निरुद्ध बंदी और कैदी इन दिनों खास गुलाल तैयार करने में जुटे हैं। यह कैदी हर्बल तरीके से गुलाल बना रहे हैं। होली पर लोगों को रंग गुलाल से दिक्कत न हो इसके लिए हर्बल गुलाल जिला जेल में तैयार किया जा रहा है। जिला जेल में करीब 1700 कैदी बंद हैं। विभिन्न मामलों में निरुद्ध यह बंदी हर त्यौहार को खास बनाने के लिए कुछ न कुछ करते रहते हैं। होली पर्व के नजदीक आते ही अब मथुरा जेल में बंद कैदी सोनू पुत्र साहब सिंह, सनी पुत्र होरी लाल, रिंकू पुत्र अशोक,अशरफ पुत्र मारूफ खान,विजय पुत्र मुरारी व हरेंद्र पुत्र निहाल सिंह हर्बल गुलाल तैयार करने में लगे हुए हैं। जिला जेल में इन दिनों होली के लिए हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। जेल में निरुद्ध कैदी अरारोट में सब्जियों को मिलाकर गुलाल तैयार कर रहे हैं। हर्बल गुलाल बनाने के लिए अरारोट में पालक को पीसकर उसमें से हरा रंग निकाल कर मिलाया जा रहा है। इसी तरह मैथी को पीसकर हल्का हरा रंग,चुकंदर को पीसकर लाल रंग,हल्दी पाउडर का प्रयोग कर पीला गुलाल तैयार किया जा रहा है। इसमें खुश्बू बनी रहे इसके लिए इत्र मिलाया जा रहा है। जिला जेल में बन रहा गुलाल आम लोगों तक पहुंचे इसके लिए भी जेल प्रशासन ने इंतजाम किए हैं। जेल में निरुद्ध कैदियों द्वारा बनाए जा रहे गुलाल पर करीब 180 रुपए प्रति किलो की लागत आ रही है। इस गुलाल को 200 रुपए किलो के हिसाब से बिक्री किया जायेगा। गुलाल के 100-100 ग्राम के पैकेट जेल के मुख्य द्वार पर बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि कौशल विकास मिशन के तहत कैदियों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। जिससे वह जब भी जेल से रिहा हों तो समाज के बीच रहकर अच्छा कार्य करते हुए अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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