हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। फरह में मां की इस मजबूरी का खामियाजा सात महीने में जन्म लेने वाली मासूम पहले ही दिन से भुगत रही है। 31 अगस्त को फरह के सलेमपुर रोड पर कोई बेरहम एक दिन की नवजात को बोरे में लपेटकर कूड़े के ढेर पर छोड़कर चला गया। कीड़ों के नोचने पर जब बच्ची ने रोना शुरू किया तो लोगों ने उसकी आवाज सुनी और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया। अब जिला अस्पताल के चिकित्सक बच्ची को सांसें देने में जुटे हुए हैं। क्रिटिकल केयर यूनिट में बच्ची की देखभाल कर रहे डाॅक्टर विशाल सिंह ने बताया कि बच्ची की उम्र करीब सात महीने है। उसे पहले वृंदावन के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2 सितंबर को उसे वृंदावन से जिला अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती किया गया था। कीड़ों के काटने के कारण बच्ची बुरी तहत से जख्मी भी हो गई थी। प्रीमेच्योर होने के कारण उसका वजन करीब 900 ग्राम है। लगातार ड्रेसिंग करने से जख्म तो सही हो गए हैं, लेकिन वह खतरा अभी टला नहीं है। बच्ची को शुरू में ऑक्सीजन पर रखा गया था, लेकिन केवल दो दिन बाद ही वह सामान्य तरीके से सांसें लेने लगी है। डाॅ. विशाल का कहना है कि चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ उसे पीहू कहकर बुलाता है। पीहू को शुरुआत में नली से दो एमएल दूध दिया जाता है। अब वह 10 एमएल तक दूध पीने लगी है। उसका वजन बढ़ाने के लिए आईबी फ्लूड भी दिया जा रहा है। अगर वह और तीन-चार दिन इसी तरह से दूध पीती रही तो कटोरी-चम्मच से दूध पिलाया जाएगा। इससे उसके स्वस्थ होने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
7455095736
मां की कैसी मजबूरी,नौ माह भी कोख में नहीं रख सकी नन्ही जान, फेंका कूड़े में नवजात
