हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन क्षेत्र में लंपी के 100 मामले सामने आने के बाद पशु चिकित्सा विभाग सतर्क हो गया है। गोवंशों के बचाव के लिए पानी गांव क्षेत्र में एक निजी गोशाला को आइसोलेशन केंद्र बनाया गया है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राकेश तिवारी के निर्देशन में डॉक्टरों की टीम गोशालाओं और पशुपालकों के घर जाकर टीकाकरण कर रही है। वृंदावन नगर क्षेत्र के 45 गांवों में कुल 32 हजार गोवंश हैं। इनमें से 28 हजार गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। बीमार गोवंश, बछड़े और गर्भवती गायों का टीकाकरण अभी नहीं किया गया है। डॉक्टर तिवारी ने बताया कि लंपी से संक्रमित जो गायें पशुपालकों के पास हैं, उनका इलाज वहीं किया जाएगा। आइसोलेशन केंद्र में केवल निराश्रित गायों को रखा जाएगा। प्रत्येक गोवंश पर निगरानी रखी जा रही है, जिसमें किसानों और पशुपालकों का सहयोग लिया जा रहा है। लंपी त्वचा रोग गायों में होने वाला एक विषाणु संक्रमण है। रोग के कारण और प्रसार डॉक्टर राकेश तिवारी के अनुसार, यह विषाणु मक्खियों, मच्छरों और चिंचड़ों जैसे खून चूसने वाले कीटों से फैलता है। दूषित पानी, चारे और संक्रमित पशु की लार से भी संक्रमण फैल सकता है। सीधे संपर्क से भी यह रोग एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है। यह एक संक्रामक रोग है जो तेजी से फैलता है। संक्रमण होने पर पशु के पूरे शरीर पर 2-5 सेमी आकार की कठोर गांठें बन जाती हैं। शुरुआती दिनों में 104-106 फारेनहाइट तक बुखार, दूध में गिरावट, आंख-नाक से स्राव, पैरों में सूजन, लंगड़ापन और भूख न लगना इसके प्रमुख लक्षण हैं। बचाव के लिए, संक्रमित पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग करें और गोट पॉक्स टीका लगवाएं। मच्छर, मक्खी और चिंचड़ रोकने के लिए कीटाणुनाशक स्प्रे या नीम के धुएं का प्रयोग करें। संक्रमित पशु के खाने-पीने के बर्तन और चारा अलग रखें।
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Author: Vijay Singhal
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